Saturday, January 23, 2021
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बड़े काम के हैं चाणक्य की नीतियां..जीवन में कभी नहीं करना पड़ेगा इन दुखों का सामना 

चाणक्य की नीतियां हर इंसान के लिए बड़े काम की हैं। अगर कोई भी व्यक्ति चाणक्य की नीतियों को अपने जीवन में आत्मसात कर लेता है तो फिर यकीनन उसका जीवन बड़ा सुलभ हो जाता है, चूंकि चाणक्य हमें ऐसी नीतियों के बारे मे बताते हैं, जिनका सहारा लेते हुए हम अपने जीवन की गतिविधियों को काफी सुगम बना सकते हैं। इस बीच आज हम आपको उन खास और बड़े काम की नीतियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो हमारे साथ-साथ आपके लिए भी बड़े काम की हैं..आखिर कौन सी हैं..वे सभी नीतियां जानने के लिए पढ़िए हमारी ये खास रिपोर्ट?

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गुरु का हमेशा करें सम्मान 
गुरु के निहितार्थ को जानने से पूर्व आपको उसके शाब्दिक अर्थ को जानना होगा। ‘गु’ का अर्थ होता है अंधकार और ‘रू’ का अर्थ होता है ज्योति। कुल मिलकार बड़ी सहजता के साथ कहा जा सकता है कि जो व्यक्ति हमें अंधकार से ज्योति में लेकर आते हैं.. जो हमें अज्ञान से ज्ञान में लेकर आते हैं। उन्हें गुरु की संज्ञा दी जाती है। अब गुरु के संदर्भ में चाणक्य ने जो नीतियां हमें दी हैं। वो बेहद मकबूल हैं। चाणक्य अपनी नीतियों के संदर्भ में कहते हैं कि हमें हमेशा गुरु का सम्मान करना चाहिए। उनकी आज्ञाओं का पालन करना चाहिए। चाणक्य कहते हैं कि जो शख्स अपने गुरु का सम्मान नहीं करता है। उसे अपने जीवन में बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। लिहाजा हमें हमेशा गुरु का सम्मान करना चाहिए।

धार्मिक गतिविधियों का पालन 
इसके साथ ही चाणक्य अपनी नीतियों में हमें धर्म के बारे में सिखाते हुए कहते हैं कि हमें कोई भी धार्मिक कार्य बहुत संजीदगी के साथ चाहिए, चूंकि चाणक्य के अनुसार धार्मिक गतिविधियों में तनिक लापरवाही व चूक हमारे लिए खतरे का सबब बन जाती है। लिहाजा हमें धार्मिक गतिविधियों का गंभीरता से पालन करना चाहिए, ताकि हम अपने जीवन में संपन्न हो सके।

औषधि का ज्ञान 
चाणक्य ने अपनी नीतियों में साफ कहा है कि औषधियों का ज्ञान बेहद आवश्यक है। हर व्यक्ति को औषधि का ज्ञान होना चाहिए। औषधि का ज्ञान हमारे जीवन को सरल व सहज बना देता है एवं कठिनाइयों के समय में यह हमारे लिए बेहद ही लाभकारी साबित होता है। किसी भी आपदाकलीन समय में हमारे पास मौजूदा औषधि का ज्ञान लाभदायक साबित हो सकता है।

धन का कमाना 
चाणक्य अपनी नीतियों में कहते हैं कि धन का कमाना जितना कठीन होता है। उससे भी ज्यादा कठिन होता है। उसे खर्च करना। लिहाजा हमें अपने धन को इस तरह खर्च करना चाहिए ,ताकि निकट भविष्य के लिए हमारे पास कुछ शेष बचा रहे हैं। यह हमारे लिए लाभदायक साबित हो सकता है।

कभी न करें अन्न का अपमान 
इसके साथ ही चाणक्य अपनी नीतियों में अन्न का अपमान न करने की बात कहते हैं। वे कहते हैं कि जो व्यक्ति अन्न का अपमान करता है। वो कभी भी खुश नहीं रहता है, लिहाजा जीवन में हमेशा सुखी व संपन्न रहने के लिए हमें हमेशा अन्न का सम्मान करना चाहिए। अन्न को कभी-भी बेवजह नहीं फेंकना चाहिए।

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