आज से शुरू हुई चैत्र नवरात्रि, मां दुर्गा के इन नौ स्वरूपों की पूजा से होंगे सभी कष्ट दूर, जानें मां के हर रूप का महत्व

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MAA DURGA

पूरे देशभर में नवरात्रि की धूमधाम है. इस बार की चैत्र नवरात्रि यानी वसंत ऋतु की नवरात्रि आज से शुरू हो गई है. आज से यानी 25 मार्च से शुरू हुई ये नवरात्रि 2 अप्रैल को खत्म होगी. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सालभर में नवरात्रि का त्यौहार दो बार आता है. लेकिन चैत्र की नवरात्रि इसलिए भी लोगों के लिए खास हो जाती है, क्योंकि इन दौरानों में माता दुर्गा की पूजा के साथ घर के कुल देवी-देवताओं की पूजा भी पूरे विधि-विधान के साथ की जाती है. पूरे नौ दिनों में माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है. ऐसे में आज हम आपको अपनी इस खबर के जरिए मां दुर्गा के नौ रूपों के बारे में बताने के साथ उन श्लोकों के बारे में भी बताएंगे, जिनके द्वारा शास्त्रों में माता के 9 रूपों का बखान किया गया है.

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मां का इन श्लोकों से किया गया बखान
प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।
तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति. चतुर्थकम्।।

पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।
सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्।।

नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा: प्रकीर्तिता:।
उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना:।।

मां शैलपुत्री
इस बात से हर कोई वाकिफ है कि मां दुर्गा के पहले रूप को ‘शैलपुत्री’ के नाम से जाना जाता है. ये मां के प्रथम रूप में पहले दिन पूजी जाती हैं. कहा जाता है कि पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लेने की वजह से इनका नाम ‘शैलपुत्री’ रखा गया. कहते हैं कि मां शैलपुत्री की पूजा करने से चंद्रमा से जुड़े सभी दोष समाप्त हो जाते हैं.

मां ब्रह्मचारिणी
नवरात्रि के दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी की पूजा-अराधना की जाती है. मां ब्रह्मचारिणी ने भगवान शंकर को पति के रूप में पाने के लिए घोर तपस्या की थी. यही कारण है कि इन्हें ब्रह्मचारिणी के नाम से पूरे संसार में जाना जाता है. कहा जाता है कि मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना करने से जिसकी भी कुंडली में मंगल ग्रह का बुरा प्रभाव होता है वो कम जो जाता है.

मां चंद्रघंटा
नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे रूप चंद्रघंटा की पूजा की जाती है. ध्यान से आप मां चन्द्रघंटा को देखेंगे तो उनके माथे पर घंटे के आकार का आधा चंद्र दिखेगा, यही वजह है कि इन्हें चन्द्रघंटा के नाम से जाना जाता है. मां चंद्रघंटा की पूजा करने से शुक्र ग्रह के सभी बुरे प्रभाव दूर हो जाते हैं.

मां कुष्मांडा
नवरात्रि के चौथे दिन देवी कुष्मांडा के स्वरूप की पूजा और उपासना की जाती है. कहा जाता है कि उन्होंने अपनी हल्की हंसी से पूरे ब्रह्मांड को उत्पन्न किया था. मां कुष्मांडा की आठ भुजाएं हैं. मां कुष्मांडा की पूजा से सूर्य के सभी दुष्प्रभाव से बच सकते हैं.

मां स्कंदमाता
व्रत के पांचवे दिन नवरात्रि में स्कंदमाता की पूजा होती है. मान्यता है कि इनकी पूजा करने से इनकी ऐसी कृपा इंसान पर होती है कि मूर्ख व्यक्ति भी ज्ञानी हो जाता है. स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता होने की वजह से ही इन्हें स्कंदमाता के नाम से पूरे संसार में जाना जाता है. ये बुध ग्रह सभी बुरे प्रभाव को कम कर देती हैं.

मां कात्यायनी
मां दुर्गा को कात्यायनी के छठे रूप में पूजा जाता है. माता कात्यायनी की पूजा उपासना करने से भक्तों को आसानी से धन, धर्म, काम और मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है. कहा जाता है कि महर्षि कात्यायन ने पुत्री प्राप्ति के लिए मां भगवती की घोर और कठिन तपस्या की थी. जिसके बाद माता ने उनके घर में पुत्री के रूप में जन्म लिया था. इसके बाद से ही उनका नाम माता कात्यायनी पड़ा.

मां कालरात्रि
नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की उपासना की जाती है. मान्यता है कि माता, कालरात्रि की पूजा करने से ब्रह्मांड की सारी सिद्धियों के दरवाजे खुल जाते हैं, यहां तक कि जितनी भी असुरी शक्तियां होती हैं, उनका नाश हो जाता है. इनके नाम से ही बुरी शक्तियों में डर पैदा हो जाता है.

मां महागौरी
माता दुर्गा के आठवें रूप को महागौरी के नाम से पूजा जाता है. इनकी उम्र आठ साल की मानी गई है. माता महागौरी के सारे वस्त्र और आभूषण सफेद रंग के होते हैं. यही कारण है कि उन्हें श्वेताम्बरधरा का भी नाम दिया गया है. बता दें कि माता महागौरी की पूजा करने से राहु के सभी बुरे प्रभाव कम हो जाते हैं.

मां सिद्धिदात्री
नवरात्रि के अंतिम और 9वें दिन माता सिद्धिदात्री की पूजा-उपासना की जाती है. कहते हैं कि इस दिन शास्त्रीय तरीके से पूजा करने और निष्ठा से उनकी साधना करने से सभी व्यक्तियों को सिद्धियों की प्राप्ति होती है. कहते हैं कि भगवान शिव ने भी सिद्धिदात्री की कृपा से ये सभी सिद्धियां प्राप्त की थीं. उनकी पूजा करने से केतु ग्रह से समाप्ति मिलती है.

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