देवशयनी एकादशी की शुरूआत, 4 महीने तक न करें ये शुभ काम, ये छोटी सी गलती पड़ सकती है भारी

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Devshayani ekadashi 2020

नए महीने की शुरूआत के साथ ही आज से देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi 2020) की शुरूआत हो गई है. जी हां आज से पूरे 4 महीने तक के लिए भगवान विष्णु पाताल लोक जा रहे हैं. इसके बाद से सृष्टि से जुड़ा सारा कारोभार भगवान शंकर संभालेंगे. साथ ही पूरे 4 महीने के लिए हर तरह के शुभ कार्य पर रोक लग गई है. किसी भी तरह के शुभ काम अब 25 नवंबर को देवउठनी एकादशी के बाद से ही किया जा सकेगा. अभी तक लॉकडाउन की वजह से जिनकी शादियां टली हैं, उनके लिए शुभ मुहूर्त अब नवंबर और दिसंबर में ही निकलेगा. देखा जाए तो इन महीनों में भी बहुत ही कम शुभ मुहूर्त हैं. इसके बाद दिसंबर महीने की 15 तारीख से फिर से पौष मास की शुरुआत हो जाएगी, जिसमें किसी भी तरह के मांगलिक कार्य नहीं किए जाते.

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क्या है देवशयनी एकादशी
आपको बता दें कि देवशयनी एकादशी को कई नामों से पुकारा जाता है, जैसे आषाढ़ी एकादशी, हरिशयनी और पद्मनाभा एकादशी. इस एकादशी को प्रभु विष्णु का शयन कहा जाता है. यानी कि ये वो दिन होता है, जब भगवान विष्णु शयन के लिए पाताल लोक का रूख कर जाते हैं. पुराणों की माने तो इस दिन से भगवान विष्णु पूरे चार महीनों के लिए क्षीरसागर में शयन करते हैं. यही वजह है जिसे चातुर्मास भी कहा जाता है. क्योंकि 4 महीने के लिए हर तरह के शुभ कामों पर रोक लग जाती है.

गलती से भी न करें ये काम
हिंदू धर्म में हर त्योहार और व्रत का खास महत्व माना गया है. ऐसे में इस बात का खास ध्यान रखें कि देवशयनी एकादशी के दिन चावल न खाएं. कहते हैं कि जो व्यक्ति चावल का ग्रहण करता है, उसका मन बहुत चंचल हो जाता है और भगवान की भक्ति में उसका मन नहीं लगता. इतना ही नहीं कहा जाता है कि एकादशी वाले दिन बिस्तर पर नहीं, जमीन पर ही सोना चाहिए. इसके साथ ही इस बात का भी खास ख्याल रखें कि इस दिन भूलकर भी मांस और नशीली वस्तुओं का सेवन न करें. क्योंकि आज के दिन भगवान विष्णु की खास पूजा होती है. कुछ भी खाने से पहले स्नान जरूर कर लें.

भगवान विष्णु के मंत्र का करें जाप
माना जाता है कि एकादशी की शाम भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करने से मन को संतुष्टि मिलती है. उनके नाम के मंत्रों का जाप करने से जीवन में शुभ फल की प्राप्ति होती है. दरअसल श्रीहरी के मंत्रों का जाप तुलसी या चंदन की माला से करना शुभ और फलदायी माना गया है.

इन मंत्रों का करें जाप
सत्यस्थ: सत्यसंकल्प: सत्यवित् सत्यदस्तथा। धर्मो धर्मी च कर्मी च सर्वकर्मविवर्जित:।। कर्मकर्ता च कर्मैव क्रिया कार्यं तथैव च। श्रीपतिर्नृपति: श्रीमान् सर्वस्यपतिरूर्जित:।। भगवान विष्णु को प्रसन्न करने का मंत्र:। सुप्ते त्वयि जगन्नाथ जगत सुप्तं भवेदिदम।। विबुद्धे त्वयि बुध्येत जगत सर्वं चराचरम। भगवान विष्णु क्षमा मंत्र:।। भक्तस्तुतो भक्तपर: कीर्तिद: कीर्तिवर्धन:। कीर्तिर्दीप्ति: क्षमाकान्तिर्भक्तश्चैव दया परा।।

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