देवशयनी एकादशी के दिन से 4 महीनों के लिए शुभ कार्यों पर लगेगा प्रतिबंध, जानें कैसे करें भगवान विष्णु को खुश

0
182
Devshayani ekadashi 2020

देवशयनी एकादशी भगवान विष्णु की पूजा करने के लिए सबसे अच्छा और शुभ समय माना जाता है. दरअसल इस बार देवशयनी एकादशी 1 जुलाई से लगने वाला है. इसी के साथ ही चातुर्मास के महीने की भी शुरूआत हो जाएगी. मान्यताओं के अनुसार ये चार महीने ऐसे होते हैं, जिनमें सभी तरह के शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है. क्योंकि कहा जाता है कि इन महीनों में यानी देवशयनी एकादशी के दिन से ही भगवान विष्णु शयन करने पाताल लोक में क्षीर सागर के अंदर चले जाते हैं. कहते हैं कि आषाढ़ महीने की एकादशी के दौरान भगवान विष्णु पूरे 4 महीनों की निद्रा पूरी करने के लिए पाताल लोक का रूख कर लेते हैं. जिसके बाद उनकी गैर-मौजूदगी में सृष्टि से जुड़ी सारी जिम्मेदारी भगवान शंकर निभाते हैं. यही वो चार महीने हैं जिन्हें चातुर्मास भी कहा जाता है.

ये भी पढ़ें:- जाने निर्जला एकादशी का क्या है महत्व?, अगर आप भी रखते हैं व्रत तो इन बातों का रखें ध्यान

माना जाता है कि इन चार महीनों के बाद एक बार फिर देवोत्थानी एकादशी पर भगवान विष्णु अपनी निद्रा से जागने के बाद सृष्टि से जुड़ा कारोभार खुद संभालते हैं, और इसके लिए वो वापस पाताल लोक आ जाते हैं. ऐसे में जितने भी विवाह जैसे शुभ काम होते हैं, उन पर लगी रोक फिर से हट जाती है. इसके बाद जीवन से जुड़े सभी शुभ कार्य की शुरूआत पुन: हो जाती है. मान्यता ये भी है कि जब भगवान विष्णु चार महीनों के लिए अपनी निद्रा के लिए क्षीर सागर में जाते हैं तो उस समय पृथ्वी पर सबसे ज्यादा बुरी शक्तियां डेरा जमाने लगती हैं. यही कारण है कि इन चार महीनों में धार्मिक कार्य, पूजा, हवन और जाप किया जाता है. ताकि सभी तरह के काले साए से खुद को बचाया जा सके.

क्यों रखा जाता है देवशयनी एकादशी का व्रत
ये बात तो आप भी जानते होंगे कि हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. खासकर आषाढ़ महीने में आने वाली देवशयनी एकादशी का बहुत महत्व माना गया है. कहा जाता है कि इस एकादशी का व्रत रखने के साथ ही जो व्यक्ति भगवान विष्णु का नाम जपता है उसके जीवन के सभी पाप खत्म हो जाते हैं और हर मनोकामना पूरी होती है. इसलिए इस एकादशी का व्रत खास माना गया है.

भगवान विष्णु की पूजा विधि
देवशयनी एकादशी को श्री हरि यानी भगवान विष्णु का शयनकाल शुरू होने की वजह से उनकी विशेष पूजा की जाती है. पूरे विधि-विधान के साथ उन्हें मनाने की कोशिश की जाती है. पदम् पुराण की माने तो देवशयनी एकादशी वाले दिन भगवान विष्णु की पूजा कमल के फूलों के साथ करने से तीनों लोकों के देवताओं की पूजा हो जाती है. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने के साथ ही भगवान विष्णु की मूर्ति को पंचामृत से स्नान करवाने के बाद उन्हें पीत वस्त्रों व पीले दुपट्टे से सजाकर श्री हरि की आरती करनी चाहिए. इस विधि के बाद भगवान को पान-सुपारी चढ़ाएं और ‘सुप्ते त्वयि जगन्नाथ जमत्सुप्तं भवेदिदम्। विबुद्धे त्वयि बुद्धं च जगत्सर्व चराचरम्।। मंत्र का जाप करते हुए उनकी स्तुति करें.

ये भी पढ़ें:- चैत्र पुर्णिमा के दिन इस तरह भगवान विष्णु को कर सकते हैं प्रसन्न, जानें पूजा की सारी विधि