Varun Gandhi

अब बीजेपी सांसद वरुण गांधी और उनकी पार्टी के बीच की दूरियां बढ़ने के साथ साथ लोगों को दिखाई भी देने लगी है। पहले पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रहे वरुण पहले काफी समय से पार्टी में नजरअंदाज किया जा रहा था। न तो संगठन उनको में ही महत्वपूर्ण जगह मिल रही थी और न ही केंद्र सरकार में कोई जगह मिल पा रही थी। अब लखीमपुर खीरी की घटना के साथ भाजपा की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन वरुण की नाराजगी क्या बड़ा कारण बनी है।

दोनो को नहीं मिली जगह

वरुण गांधी और मेनका गांधी दोनों को ही नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में नहीं रखा गया है। इसके पहले दोनों ही नेता नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल थे। संगठन में उनकी कम होती रुचि भी इसका एक कारण बन रही थी। वैसे भी कार्यकारिणी के पुनर्गठन में 25 से 30 फीसदी मेंबर बदले जाते हैं और इस बार भी पार्टी में कई प्रमुख नेताओं को बदल दिया है।

तो वहीं वरुण और उनकी मां मेनका गांधी, गांधी परिवार से रिलेशन रखते हैं, इसलिए उनको यहां से हटाए जाना चर्चा का विषय बना रहा। असल में, मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में मेनका गांधी को मंत्री नहीं बनाया था। इसी के बाद से ही यह दूरी दिखने लगी थी। वरुण गांधी भी संगठन के कामों में अधिक मन लगा कर अपने विचार नहीं रख रहे थे और हाल ही में उनके द्वारा दिया गया बयान भी चर्चा का विषय रहा कि उन्हें नहीं मालूम था कि वह कार्यकारिणी में भी थे या नहीं।

अब जबकि उत्तर प्रदेश के चुनाव सिर पर आ चुके है। इस समय वरुण गांधी के बयान भाजपा को असहज करने वाले लग रहे हैं। हालांकि भाजपा नेतृत्व भी वरुण गांधी को के बयानों को अधिक तवज्जो नहीं दे रहा है। उनके किसी भी बयान पर कोई रिएक्शन भी नहीं दी जा रही है। इससे ये बात साफ होने के संकेत मिल रहे हैं कि भाजपा वरुण गांधी को लेकर बहुत ज्यादा गंभीर नहीं है।

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