कांग्रेस में ‘लेटर बम’ पर राजनीति तेज, सोनिया गांधी ने शीर्ष नेतृत्व में किया बड़ा फेरबदल

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कांग्रेस पार्टी में इन दिनों सियासी उथल-पुथल तेज हो गई है, जिसके पीछे का कारण लेटर बम बताया जा रहा है। दरअसल इस लेटर बम के चलते कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पूरा सियासी प्रकरण ही बदल कर रख दिया। जिन लोगों ने सोनिया गांधी को पत्र लिख कांग्रेस में अगले अध्यक्ष के चुनाव कराने की कवायद की थी, उनमें से कुछ नेताओं को अलग-अलग स्टेट ट्रांसफर कर दिया गया। यानि की कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा लिया गया यह एक्शन दर्शाता है कि पार्टी में सच की नींव को दबाने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। इसीलिए आज कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व में इतना बड़ा फेरबदल किया गया। इतना ही नहीं गांधी परिवार के सबसे खास और शीर्ष नेतृत्व में शुमार गुलाम नबी आजाद को अपने पद से रुखसत होना पड़ गया। बताया जा रहा है कि कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी ने गुलाम नबी आजाद को महासचिव पद से हटा दिया है। इसकी जानकारी खुद सोनिया गांधी ने एक पत्र के जरिए दी है।

सोनिया गांधी द्वारा लिखे गए पत्र में कहा गया, ”पार्टी पूरे दिल से निवर्तमान महासचिवों गुलाम नबी आजाद, अंबिका सोनी, मोती वोरा, मल्लिकार्जुन खड़गे और लुइजिन्हो फलेइरो के योगदान की सराहना करती है.” हालांकि सोनिया गांधी ने यह भी कहा कि, गुलाम नबी आजाद कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य बने रहेंगे, जो कि पार्टी के शीर्ष निर्णय लेने वाला पैनल है।

सूत्रों के अनुसार असंतुष्ट नेताओं के समूह के एक अन्य सदस्य जितिन प्रसाद को परमानेंट इनवाइटी बनाया गया है. जितिन प्रसाद को पार्टी आलाकमान ने महासचिव के रूप में नामित किया है, लेकिन उन्हें उत्तर प्रदेश से बंगाल स्थानांतरित कर दिया गया है, जहां अगले साल कांग्रेस चुनाव की तैयारियों पर जोर दे रही है। प्रियंका गांधी वाड्रा तो पहले से ही यूपी की प्रभारी महासचिव हैं. उत्तर प्रदेश में भी 2022 के चुनाव की तैयारियां अभी से शुरू हो चुकी है।

आज हुए बदलावों में मुकुल वासनिक जो कि 23 पत्र-लेखकों में से एक थे, उन्हें कांग्रेस ने मध्य प्रदेश का प्रभारी महासचिव बनाया है.  मुकुल वासनिक उन 6 नेताओं में शामिल किया गया हैं जो कांग्रेस अध्यक्ष को संगठनात्मक और संचालन मामलों में सहायता करेंगे. जैसा कि सोनिया गांधी ने 24 अगस्त की बैठक में कहा था. इस पैनल के अन्य नेताओं में एके एंटनी, अहमद पटेल, अंबिका सोनी, केसी वेणुगोपाल और रणदीप सिंह सुरजेवाला हैं.

मालूम हो कि कांग्रेस पार्टी में ये बड़ा फेरबदल उस घटना के एक महीने बाद हुआ है जब पार्टी के 23 वरिष्ठ सदस्यों ने बागी तेवर दिखते हुए कांग्रेस की आंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पार्टी के आंतरिक चुनाव करवाने और

पूर्णकालिक पारदर्शी नेतृत्व की मांग की थी। इसमें गुलाम नबी आजाद ने कहा था कि संगठन की मजबूती के लिए कांग्रेस पार्टी में चुनाव कराना जरूरी है।