राजस्थान में यह दो विधायक बिगाड़ देंगे सारा खेल, गहलोत सरकार की जा सकती है कुर्सी!

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राजस्थान की राजनीति में इन दिनों सियासी बयानबाजी जोरों पर है, किसी को नहीं पता कि सत्ता का ऊंट किस करवट बैठेगा?. हालांकि अगर आंकड़ों की बात की जाए तो गहलोत खेमा का पलड़ा यहां भारी है, लेकिन फ्लोर टेस्ट से पहले कौन किस पार्टी में शामिल हो जाए यह किसी को नहीं पता. वहीं इन सबके बीच राजस्थान के वर्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत शुरू से ही दावा करते आ रहे हैं, कि उनकी पार्टी को कोई खतरा नहीं हैं. लेकिन सच्चाई यह भी है कि सचिन पायलट कांग्रेस से बागी होने के बाद जमकर बगावत पर उतर आए हैं, इतना ही नहीं अब यहां लड़ाई दो गुटों में बट गई है. पहला पायलट गुट और दूसरा गहलोत गुट. और अगर फिर भी बात नहीं बनती है तो बीजेपी की नजर लगातार कांग्रेस के विधायकों पर है, राजस्थान में अब कांग्रेस सरकार अधर में लटकी हुई है. इसी के डर से सीएम गहलोत ने अपने विधायकों को जयपुर से जैसलमेर रवाना कर दिया, ताकि बीजेपी सेंधमारी न कर सके।

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तो चलिए आपको बताते हैं राजस्थान में सरकार बनाने के लिए कुल कितना बहुमत चाहिए.. दरअसल सीएम गहलोत लगातार यह दावा कर रहे हैं कि उनके पास 109 विधायकों का समर्थन है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट की मानें तो गहलोत कैंप में 99 विधायक ही है, इन 99 में से 92 विधायक जयपुर से आज जैसलमेर पहुंचे हैं, जबकि 4 मंत्री समेत 7 विधायक जयपुर में हीं हैं, हालांकि ऐसा कहा जा रहा है कि इसमें से कुछ विधायक शनिवार को जैसलमेर पहुंच सकते हैं।

बता दें कि राजस्थान में सरकार बनाने के लिए 200 सदस्यीय विधानसभा में से 101 विधायकों के समर्थन की जरुरत होती है, अशोक गहलोत को बहुमत साबित करने के लिये सीपीएम विधायक बलवान पूनिया ने कुछ समय पहले साथ देने का भरोसा दिया था, लेकिन ना तो वो जयपुर में बाड़ेबंदी में थे और ना ही जैसलमेर पहुंचे हैं, अगर पूनिया कांग्रेस के पक्ष में वोट नहीं करते हैं, कि गहलोत सरकार के पास 99 विधायक ही रहेंगे, यानि गहलोत सरकार को खतरा है।

वहीं सीएम गहलोत अंदरखाने अपनी सरकार बचाने के लिये विधायकों को साधने में लगे हैं, निर्दलीय और छोटे दलों के विधायकों पर गहलोत की नजर है, हालांकि विरोधी खेमा भी उन्हीं विधायकों को टारगेट कर रहा है, सीपीएम के पास दो विधायक हैं, गहलोत इस कोशिश में हैं, कि दोनों को अपने खेमे में लाया जाए. लेकिन खुलकर दोनों विधायक कुछ भी नहीं बोल रहे हैं।

इसके साथ ही गहलोत खेमे के एक मंत्री मास्टर भंवर लाल इतने बीमार हैं कि मतदान नहीं कर सकते, फिलहाल उनका मत किसी भी कैंप में नहीं हैं, विधानसभा स्पीकर सीपी जोशी सिर्फ पक्ष-विपक्ष की समान मत संख्या पर ही मतदान करा सकते हैं, अगर सीएम गहलोत के पास 99 मत रहते हैं, तो सीपी जोशी भी सरकार नहीं बचा सकते। इसलिए सीपीएम के

इन दो विधायकों पर पक्ष और विपक्ष की नजर बनी हुई है। यह कहा नहीं जा सकता कि अंत में इन विधायकों ने बीजेपी से हाथ मिला लिया तो राजस्थान में कांग्रेस की सरकार का क्लीन स्वीप होना तय है, अगर कांग्रेस इन्हें साधने में कामयाब रही तो सरकार सुरक्षित है।

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