दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के पहले केंद्रीय कैबिनेट में भी विस्तार की आहटें सुनाई देने लगी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि अभी तक लगभग दो दर्जन मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा हो चुकी है। जल्दी ही सारे मंत्रालयों के काम काज की समीक्षा का काम पूरा कर लिया जाएगा। वर्तमान मोदी सरकार में अभी 60 मंत्री हैं, जबकि संविधान के अनुसार इनकी संख्या 79 तक हो सकती है। कई मंत्रियों के पास दो से तीन मंत्रालयों का प्रभार है। शुक्रवार शाम को प्रधानमंत्री ने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह के साथ मिल कर कुछ मंत्रालयों की जानकारी ली है। बीते एक साल से करोना के चलते मंत्रिमंडल विस्तार की स्थितियां नहीं बन पाई थीं। अब कैबिनेट को बढ़ाने की तैयारी है। वर्तमान केन्द्रीय कैबिनेट में अभी उनके अलावा 21 कैबिनेट और 9 राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार और 29 राज्य मंत्री हैं। कुछ मंत्रियों के पास कई मंत्रालय होने से मंत्रि परिषद के साथियों की कुल संख्या 54 है।

जिन लोगों को मंत्रिपरिषद के भावी फेरबदल और विस्तार में शामिल किया जा सकता है, उनमें असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल, बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी, सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया, बैजयंत पांडा के नाम बताये जा रहे हैं। मंत्रीमंडल विस्तार में जनता दल यू को भी शामिल करने की स्थितियां बन सकती हैं। मोदी सरकार में अभी भाजपा के सहयोगी दलों से एक भी कैबिनेट मंत्री नहीं है। सहयोगी दलों में अकेले रिपब्लिकन पार्टी के रामदास आठवले राज्य मंत्री हैं।

इस महीने के आखिर में या अगले महीने की शुरुआत में मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला विस्तार सम्भव है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ दिनों से भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह के साथ विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज की समीक्षा में जुटे हुए हैं। सामान्यतया मंत्रिमंडल फेरबदल और विस्तार के पहले इस तरह की कवायद की जाती है।

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