कांग्रेस के इस कद्दावर नेता की भविष्यवाणी, ‘अगले 50 सालों तक विपक्ष में रहेगी कांग्रेस’

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देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस का सुरत-ए-हाल आज किसी से छुपा नहीं है। आलम यह है कि कल तक देश की सियासत मेंं जिसकी तूती बोला करती थी। आज वो महज कुछ ही राज्यों तक सिमट कर रह गई है और जिन राज्यों में उनकी सरकार बची है, उन्हें वहां पर भी सत्ता संघर्ष से दो चार होना पड़ रहा है। कभी मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया का कांग्रेस को अलविदा कहना तो कभी राजस्थान में सचिन पालयट के बगवाती रूख और अब हाल ही फूटे लेटर बम से तो पार्टी अपने मूल पथ से ही विचलित हो चुकी है।

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वहीं, जब पार्टी के कद्दावर नेताओं ने बदलाव का मन बनाया तो राहुल गांधी समेत समस्त गांधी परिवार ने उनके मन में चल रहे बदलाव के बहाव को रोकने की जहमत उठाई। विदित हो कि गत दिनों जब पार्टी ने अंतिरम अध्यक्ष सोनिया गांधी से स्थायी अध्यक्ष की मांग करते हुए खत लिखा तो राहुल गांधी खफा हो गए। इतना ही नही, उन्होने तो कांग्रेसी नेताओं के सांठगांठ बीजेपी नेताओं से तक बता डाले, जिस पर गुलाम नबी आजाद सहित अन्य कांग्रेसी नेताओं ने इस्तीफे तक की पेशकश कर डाली, बाद में राहुल ने फौरन अपने बयान से पलटी मारते हुए कहा कि उनका मतलब वो नहीं था..जो वो समझ रह हैं।

खैर, किसने क्या समझा और क्या नहीं, यह तो गुलाम नबी आजाद के हालिया बयान से साफ झलक रहा है। आजाद ने अपने बयान से एक मर्तबा फिर बदलाव की मुहीम पर जोर दिया। उन्होंने पार्टी में बदलाव पर जोर देते हुए कहा कि यदि पार्टी के विभिन्न पदों के लिए चुनाव नहीं कराए गए तो अगले 50 वर्षों तक हम विपक्ष में ही बैठी रहेंगे। उनके इन वक्तव्यों से यह सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि वे पार्टी में बदलाव के लिए किस कदर उत्तेजित हैं। फिलवक्त अब तो उनके इस बयान से पार्टी आलाकमान  पर क्या असर पड़ता है यह तो फिलहाल आने वाला वक्त बताएगा, मगर इस दौरान उन्होंने पार्टी के कई  मसलों का जिक्र करते हुए अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने कहा कि अगर किसी को कांग्रेस के आतंरिक कामकाज में रूची होगी तो वो इस प्रस्ताव पर जरूर सहमति देगा। अगर पार्टी को मजबूत करना तो संगठन के हर स्तर पर चुनाव कराने होंगे।

आजाद ने कहा कि चुनाव कराने का लाभ यह होता है कि जब आप चुनाव जीतते हैं तो कम से कम आपकी पार्टी के 51% सदस्य आपके साथ खड़े होते हैं। अभी, अध्यक्ष बनने वाले व्यक्ति को एक प्रतिशत समर्थन भी नहीं मिल सकता है। अगर सीडब्ल्यूसी सदस्य चुने जाते हैं, तो उन्हें हटाया नहीं जा सकता है. इसमें समस्या कहां है?’

इस दौरान आजाद ने गांधी परिवार का जिक्र करते हुए कहा कि हमने पार्टी में चुनाव कराने के लिए राहुल गांधी को कुछ सुझाव दिए थे,  जिसमें कुछ दिक्कत थी। सोनिया  गांधी ने हमें अगले महीने तक चुनाव कराने की बात कही है, लेकिन कोरोना संकट के दृष्टिगत ऐसा संभव होता हुआ नहीं दिख रहा है। यही  कारण हैं कि हमने सोनिया गांधी से 6 महीने के दौरान अध्यक्ष पद का चुनाव कराने के लिए कहा है। आजाद ने अपने बयान में कहा कि हमारी मंशा पार्टी को मजबूत करने की है।  लेकिन जिन लोगों को अपाइमेंट कार्ड मिले हैं, वे लोग हमारे प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं।

गौरतलब है कि बीते दिनों गुलाम नबी आजाद सहित अन्य नेताओं ने पार्टी में स्थायी अध्यक्ष की मांग करते हुए सोनिया गांधी को पत्र लिखा था। इस पत्र में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद, पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल, शशि थरूर, मनीष तिवारी, आनंद शर्मा, पीजे कुरियन, रेणुका चौधरी, मिलिंद देवड़ा और अजय सिंह शामिल हैं. इनके अलावा सांसद विवेक तन्खा, सीडब्ल्यूसी सदस्य मुकुल वासनिक और जितिन प्रसाद, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, राजेंद्र कौर भट्ठल, एम वीरप्पा मोइली और पृथ्वीराज चव्हाण ने भी पत्र पर दस्तखत किए थे।

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