Saturday, January 23, 2021
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सोनिया गांधी के इस गलत फैसलें ने 2014 में डुबाई थी कांग्रेस की नाव, प्रणब मुखर्जी ने किताब में खोले कई राज

एक दौर था जब पूरे देश में कांग्रेस (Congress) का डंका बजता था और आज का वक्त है कि कांग्रेस डूबने के कगार पर है। पार्टी के लिए नए चेहरे की तलाश की जा रही है जो पार्टी को एक नया प्रारुप दे सके। अगले कुछ महीनों तक पार्टी के नए अध्यक्ष के लिए चुनाव शुरू हो जाएंगे। इस बीच, जल्द ही बाजार में एक ऐसी पुस्तक लॉन्च होने वाली है जो कांग्रेस के सारे पोल खोलने के लिए काफी है। इस पुस्तक को किसी और ने नहीं बल्कि देश के पूर्व राष्ट्रपति दिवंगत प्रणब मुखर्जी (Pranab Mukherjee) ने लिखी है। प्रणब मुखर्जी एक ऐसी शख्सियत थे जो कांग्रेस के हर राज से वाकिफ थे।

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कांग्रेस के राज से उठेगा पर्दा
प्रणब मुखर्जी की नई किताब कांग्रेस के उद्धार और पतन के बारे में सभी राज खोलेगी। इस किताब में कांग्रेस के बीते सालों के प्रदर्शन, फैसले और कई राज खोलेगी जिसकी वजह से पार्टी 2014 और 2019 का चुनाव बुरी तरह हारी थी। दिवंगत राष्ट्रपति की कांग्रेस पर लिखी किताब द प्रेजेडेंशियल इयर (The Presedential Year) अगले महीने यानि जनवरी से बाजार में आएगी। इस किताब में कांग्रेस के पतन के साथ प्रधानमंत्री चुनाव पर भी बातें भी हैं कि कैसे सोनिया गांधी ने प्रणब के बदले मनमोहन सिंह को पीएम के पद के लिए दावेदार बनाया।

मनमोहन सिंह की बिगड़ती छवि
अपनी किताब में प्रणब मुखर्जी ने अपनी उस उलझन का भी जिक्र किया जो वह मनमोहन सिंह के सामने महसूस करते थे। वह उस वक्त उलझन में होते जब उन्हें अपने से कम अनुभव वाले प्रधानमंत्री को रिपोर्ट देना होता था। सब जानते हैं कि मनमोहन सिंह ने 10 सालों तक देश की सत्ता संभाली लेकिन राजनीतिक मामलों में वह खुद को हमेशा अलग थलग ही किए रखते थे। मनमोहन सिंह को महज एक कठपुतली कहा जाता था जिसकी डोर होती थी सोनिया गांधी के पास। सवाल उठना लाज़मी है कि क्या सीरीज में घोटालों के बाद मनमोहन सिंह की धूमिल होती छवि के बावजूद पीएम न बदलकर कांग्रेस ने गलती की थी?

प्रणब मुखर्जी होते PM
पूर्व राष्ट्रपति ने अपनी किताब द प्रेडेंशियल ईयर में पीएम के पद का जिक्र करते हुए लिखा है, कुछ कांग्रेस सदस्यों ने थ्योरी बना ली थी कि अगर मैं 2004 में पीएम बना होता तो शायद 2014 की बुरी हार टाली जा सकती थी। हालांकि मैं इस दृष्टिकोण से सहमत नहीं हूं। मेरा मानना है कि मेरे राष्ट्रपति बनने के बाद पार्टी लीडरशिप ने अपना फोकस खो दिया था। सोनिया गांधी पार्टी मामलों को हैंडल कर पाने में सक्षम नहीं थीं तो वहीं डॉ. सिंह की लोकसभा में लंबी अनुपस्थिति की वजह से सांसदों से कॉन्टैक्ट नहीं हो पाता था।

इस फैसले से हुई 2014 की हार
प्रणब मुखर्जी ने अपनी किताब में 2014 चुनाव के उस गलत फैसले का खुलासा किया जो कांग्रेस ने किया था। यूपीए 2 के खराब दिनों की शुरुआत अन्ना हजारे के आंदोलन के वक्त शुरू हुई थी। तब प्रणब मुखर्जी प्रदर्शनकारियों से बातचीत के पक्ष में नहीं थे लेकिन उन्हें इसमें शामिल होना पड़ा क्योंकि मनमोहन सिंह और उनके सलाहकार नर्वस थे। पार्टी की छवि खराब हो रही थी। सभी पीएम बदलने के पक्ष में थे लेकिन सोनिया गांधी अपनी जिद्द पर अड़ी थी। वह मनमोहन के अलावा किसी और को पीएम बनता नहीं देखना चाहती थी। 2014 के चुनावों के नतीजों ने उन नेताओं को सही भी साबित किया था जो मानते थे कि प्रणब को पीएम होना चाहिए था।

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