हार के बाद कांग्रेस में तूफान, अधीर रंजन ने सिब्बल को दिखाया आईना, हाईकमान का किया समर्थन

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adhir ranjan on kapil sibal

बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली हार के बाद से ही पार्टी में खटपट शुरू हो गई है. चुनाव में मिली हार के बाद पार्टी के वरिष्ठ दिग्गज नेता कपिल सिब्बल ने पार्टी के नेतृत्व पर सवाल खड़े कर दिए थे जिसके बाद से पार्टी में जंग छिड़ गई और तमाम प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई. लेकिन अब पार्टी नेता अधीर रंजन चौधरी ही अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेता के खिलाफ बोल रहे हैं उन्होंने हाल ही में कपिल सिब्बल को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि, बिना कुछ किए बोलना आत्मनिरीक्षण होता है. तो वहीं पार्टी नेता सलमान खुर्शीद, राजीव शुक्ला से लेकर युवा ब्रिगेड के सांसद मणिक्कम टैगोर ने भी सिब्बल पर निशाना साधते हुए हाईकमान का समर्थन किया है. जिससे जंग काफी तेज हो गई है.

सिब्बल का चेहरा नहीं दिखा
दरअसल, इस सिलसिले में मंगलवार को अधीर रंजन चौधरी ने पत्रकारों से वार्ता की और उसी दौरान उन्होंने सिब्बल पर बरसते हुए हाईकमान का बचाव किया. वह बोले- ‘कपिल सिब्बल ने इस बारे में पहले भी बात की थी. वह कांग्रेस पार्टी और आत्मनिरीक्षण की आवश्यकता के बारे में बहुत चिंतित हैं. लेकिन हमने बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश या गुजरात के चुनावों में उनका चेहरा नहीं देखा.’

बिना कुछ किए बोलना आत्मनिरीक्षण नहीं
न्यूज एजेंसी ANI की मानें तो, कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा- ”अगर कपिल सिब्बल बिहार और मध्य प्रदेश जाते, तो वह साबित कर सकते थे कि जो वो जो कह रहे हैं वह सही है और इससे उन्होंने कांग्रेस की स्थिति को मजबूत किया होता लेकिन ऐसी बातें करने से कुछ हासिल नहीं होता और बिना कुछ किए बोलना आत्मनिरीक्षण नहीं है.’

पार्टी के आंतरिक मुद्दों को मीडिया में लाना गलत
वैसे अधीर रंजन चौधरी से पहले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी कपिल सिब्बल के खिलाफ बोल चुके हैं. उन्होंने सिब्बल की टिप्पणी पर कहा था कि, पूर्व केंद्रीय मंत्री को पार्टी के आतंरिक मुद्दों को मीडिया के समक्ष नहीं लाना चाहिए इससे देशभर के पार्टी कार्यकर्ताओं की भावनाओं को ठेस पहुंची है और पार्टी की छवि धूमिल हुई है.

क्या कहा था सिब्बल ने?
बता दें, बिहार में मिली हार के बाद अपने इंटरव्यू में पार्टी के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कहा था कि, उन्हें मजबूरी में अपनी बात को सार्वजनिक रूप से कहनी पड़ रही है क्योंकि पार्टी नेतृत्व ने बातचीत का कोई प्रयास ही नहीं किया. उन्होंने कहा था कि. बिहार के अलावा जहां उपचुनाव हुए हैं वहां के लोग कांग्रेस को एक प्रभावी विकल्प नहीं मानते. सिब्बल के इसी बयान के बाद से कांग्रेस में खटपट में शुरू हो गई और तमाम ऐसे बयान सामने आए जिसमें साफतौर पर सिब्बल का विरोध किया गया. फिलहाल देखना होगा कि, चुनाव के बाद आए सिब्बल के बयान से पार्टी में जो तूफान मचा है वो कौन-सा नया मोड़ लेता है. क्योंकि कई नेता हाईकमान के समर्थन में उतर आए हैं.

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