योगी सरकार का सख्त एक्शन, सरकारी कर्मचारियों के बीच हड़कंप!

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उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाणिज्य कर विभाग के काडर पुनर्गठन मामले में रिपोर्ट तलब की है। दरअसल सरकार के पास भारी-भरकम स्टाफ वाला कार्मिक विभाग होने के बाद भी वाणिज्य कर विभाग के काडर पुनर्गठन के लिए आईआईएम को 69 लाख का भुगतान करने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। वाणिज्य कर विभाग के इस फैसले के खिलाफ अधिकारी और कर्मचारी संगठनों की शिकायतों के आधार पर सीएम ने अपर मुख्य सचिव वाणिज्य कर से इस मामले पर एक हफ्ते में रिपोर्ट तलब की है।

अब तक सरकारी विभागों के काडर पुनर्गठन का काम कार्मिक विभाग ही करता था, लेकिन जीएसटी लागू होने और मनोरंजन कर विभाग के वाणिज्य कर विभाग में विलय के बाद काडर पुनर्गठन का काम आईआईएम को दे दिया गया। इसके लिए वाणिज्य कर विभाग ने आईआईएम को 69 लाख रुपये दे भी दिए। लेकिन भुगतान के करीब छह महिने बाद भी आईआईएम ने इस दिशा में कोई काम नहीं किया। उधर अधिकारी और कर्मचारी संगठनों ने इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जीएसटी जटिल कानून है और आईआईएम के प्रोफेसरों को इसके बारे में जानकारी तक नहीं है। फिर भी उन्हें काडर पुनर्गठन का काम दिया गया है।

यूपी चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी संघ के महामंत्री सुरेश यादव और राजकीय वाहन चालक संघ के महामंत्री प्रेम प्रकाश ने पिछले दिनों सीएम योगी को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की जानकारी दी थी। इस पर मुख्यमंत्री ने अपर मुख्य सचिव को सात दिन में आईआईएम के छह महिने के काम को लेकर रिपोर्ट तलब की है। उधर, उप्र वाणिज्य कर सेवा संघ के अध्यक्ष राज्यवर्धन सिंह और महामंत्री अवनीश मिश्रा ने वाणिज्य कर आयुक्त अमृता सोनी को सौंपे ज्ञापन में कहा है  है कि आईआईएम के जिस प्रोफेसर को काडर पुनर्गठन का काम सौंपा था, उनका इंदौर तबादला हो चुका है। इसके बाद एसोसिएट प्रोफेसर को काडर पुनर्गठन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दोनों संघो ने काडर पुनर्गठन का काम कार्मिक विभाग से कराने की मांग की है। ये भी पढ़ेः पाकिस्तान के झूठ ही झूठ, सच बोलने के बजाय आतंकियों को दे दी पनाह

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