Thursday, February 9, 2023

भगवान राम की अयोध्या में इस बार किसे मिलेगा वनवास? किसका होगा राजतिलक? जानिए आंकड़े

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2019 के लोकसभा चुनाव में इस बार कई मुद्दें सामने है। लेकिन इन सभी में अयोध्या के राम लला का मुद्दा आज भी चर्चाओं में है। जिसके चलते फैजाबाद (अयोध्या) लोकसभा सीट भी हॉट सीट बनीं हुई है। इस बार के लोकसभा चुनाव में बीजपी ने सांसद लल्लू सिंह पर अपना दांव खेला है। दरअसस लल्लू सिंह 1989 से 2007 तक लगातार पार्टी को जीत दिलाते हुए विधायक रहे है। हालांकि 2012 में लल्लू सिंह को हार का सामना करना पड़ा। लेकिन 2014 में लोकसभा चुनाव में इन्हें लोकसभा चुनाव का टिकट दिया गया। इस दौरान मोदी लहर में उन्हें जीत मिली। तो अब भी सांसद जी को जीत का पूरा भरोसा है।

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लेकिन सवाल यहां ये खड़ा है कि अयोध्या की जनता वोट किसे देगी। क्योंकि अयोध्या में इस बार विकास की लहर देखने को मिली है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने करोड़ो की परियोजनाओं की शुरूआत की। तो वही योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में दीपावली के कार्यक्रम से पूरी दुनिया के लिए केंद्र बना। सभी की नजरों अयोध्या के कार्यक्रम में थी। जिससे अब अयोध्या के विकास की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है।

इसी तस्वीर के वजह से लल्लू सिंह को भी जीत का पूरा भरोसा है। लल्लू सिंह का कहना है कि पीएम मोदी ने एक हाथ से विकास किया है और दूसरे हाथ से देश की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। यही कारण है कि आज पूरे देश का युवा उनपर भरोसा कर रहा है। इसी भरोसे से अब पीएम मोदी को जीत के साथ भारी बहुतम भी हासिल होगा।

हालांकि अब राजनीति के इतिहास पर नजर डाले, तो फैजाबाद सीट पर कई बार भगवा लहराया है तो कई बार समाजवादी पार्टी को भी यहा जीत हासिल हुई है। 2014 से पहले इस सीट पर 1991, 1996, 1999 में इस सीट पर हिंदूवादी छवि के नेता विनय कटियार को जीत हासिल हुई। जो एक समय में बीजेपी के प्रमुख चेहरों में से एक है।

वही दूसरी तरफ इसी सीट सें एक ओर नेता ने अलग अलग पार्टी में रहकर जीत हासिल की। मित्रसेना यादव अकेले ऐसे नेता है जो बीजेपी के न होने के बाद भी इस सीट से कई बार लोकसभा चुनाव जीते है। मित्रसेन ने 1989 मे कम्युनिस्ट पार्टी ज्वाइन की। जिसके बाद उन्होंने यहा से जीत हासिल की। वही 1998 में इन्होंने समाजवादी पार्टी में शामिल होते हुए चुनाव जीता। वही 2004 मे मित्रसेन ने बहुजन समाज पार्टी की सदस्ता ग्रहण की। और फिर से इसी सीट से जीत हासिल की। हालांकि सपा – बसपा गठबंधन ने मेत्रसेन की छवि को देखते हुए अब उनके बेटे अशोकसेन यादव को लोकसभा चुनाव का उम्मीदवार बनाया है।

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