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जब करगिल युद्ध में वीर जवानों से मिलने पहुंचे थे नरेन्द्र मोदी…देखिए अनदेखी तस्वीरें

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4 जुलाई को हमारे वीर जवानों ने करगिल को दुश्मनों के चंगुल से छुड़ाकर जीत दर्ज की थी। वही करगिल विजय दिवस की 20वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। 26 जुलाई को देश के कई अलग अलग हिस्सों में कार्यक्रम होंगे। वही आपको बता दें कि जब सेना के जवान करगिल युद्ध में दुश्मनों से लोह ले रहे थे उस समय पीएम नरेंद्र मोदी जवानों से मिलने पहुचे थे। चलिए आपको बताते है करगिल युद्ध के बारे कुछ बातें। ये भी पढ़े-मोदी सरकार ने तोड़ी आजादी से चली आ रही परंपरा, ब्रीफकेस की जगह लाल रंग के थैले में दिखा बजट

करगिल युद्व के हीरो रहे हिमाचल के मंडी के नगवाईं कस्बे के ब्रिगेडियर खुशहाल ठाकुर ने युद्ध की यादों को ताजा करते हुए बताया कि जब चार जुलाई 1999 को सबसे मुश्किल चोटी टाइगर हिल पर सेना ने जीत दर्ज कर ली तो युद्व में भारत का पलडा भारी हो गया। चार जुलाई 1999 का दिन हर भारतीय को याद है। 18 ग्रेनेडियर ने टाइगर हिल को दुश्मनों के कब्जे से छुड़ाकर वहां पर अपना तिरंगा फहराया था। 17 हजार फिट ऊंची टाइगर हिल पर तिरंगा लहराते ही पाकिस्तान की कमर टूट गई। दुश्मन टाइगर हिल की चोटी पर था और वहां से दुश्मन सीधे श्रीनगर, द्रास, करगिल और लेह मार्ग पर गोलाबारी कर बाधा पहुंचा रहा था। टाइगर हिल पर विजय पताका फहराने के लिए देश के करीब 44 जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। 15 मई से लेकर 2 जुलाई तक 8 सिख के जवानों ने टाइगर हिल की घेरे बंदी करके रखा। इसके बाद टाइगर हिल पर विजय पताका फहराने का जिम्मा 18 ग्रेनेडियर को दिया। ये भी पढ़े-भारत से अच्छा देश, हिन्दू से अच्छा दोस्त और मोदी से अच्छा नेता कहीं नहीं मिलेगा

17 हजार फिट ऊंची टाइगर हिल के लिए 18 ग्रेनेडियर ने करीब 36 घंटे आपरेशन चलाया और टाइगर हिल पर तिरंगा लहराया। 18 ग्रेनेडियर का नेतृत्व सेवानिवृत्त ब्रिग्रेडियर खुशहाल ठाकुर ने किया। खुशहाल ठाकुर आगे बताते है कि 18 ग्रेनेडियर की कमांडों टीम की अगुवाई कैप्टन बलवान सिंह ने की। 36 घंटे चले इस आपरेशन के लिए 18 ग्रेनेडियर के जवानों के अपने खाने के सामान को कम करने असलाह और बारूद भर लिया। टाइगर हिल को कब्जाने के लिए हवलदार योगेंद्र यादव ने लहुलूहान और बुरी तरह घायल होने के बावजूद दुश्मनों की कई चौकियों को तबाह कर दिया था और इसी वीरता के लिए हवलदार योगेंद्र यादव को देश के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परमवीर से नवाजा गया। ये भी पढ़े-जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना की हुंकार..आतंकियों पर फिर गिरी गाज  

18 ग्रेनेडियर की कमाड़ों टीम का नेतृत्व करने वाले कैप्टन बलवान सिंह को महावीर चक्र से सम्मानित किया। टाइगर हिल पर तिरंगा फहराने लिए कैप्टन सचिन और हवलदार मदन लाल को वीरचक्र से नवाजा गया था। टाइगर हिल पर विजय पताका फहराने के लिए चले 36 घंटे के आपरेशन में 18 ग्रेनेडियर के 9 जवान शहीद हुए। कारगिल युद्ध में अदम्य साहस के लिए 18 ग्रेनेडियर को 52 वीरता पुरस्कार प्रदान किए गए. 18 ग्रेनेडियर का नेतृत्व करने वाले खुशहाल ठाकुर को युद्ध सेवा मेडल से नवाजा गया। खुशहाल ठाकुर बताते है कि टाइगर हिल की लड़ाई बहुत कठिन थी। 17000 फिट की ऊंचाई पर आक्सीजन की कमी थी, सुखी और पत्थरीली सीधी चढ़ाई थी, दुश्मन चोटी पर था और छिपने के लिए एक घास का तिनका तक नहीं था। खुशहाल ठाकुर ने बताया कि जैसे ही टाइगर हिल पर भारतीय सेना ने तिरंगा लहराया पाकिस्तान की कमर टटू गई थी। ये भी पढ़े-पूर्व वायुसेना अफसर का बड़ा खुलासा करगिल और अटल बिहारी वाजपेयी को लेकर बताई बड़ी बातें

वही करगिल युद्ध के बीस साल पूरे होने के बाद देश में अलग अलग जगहों पर कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। बात दें कि भारतीय सेना ने करगिल युद्ध के समारोह की योजना पहले ही बना ली है। सेना के  अधिकारियों का कहना है कि इस साल  करगिल युद्ध के 20 साल पूरे होने पर जो समारोह आयोजित किया जाएगा वह यादगार होगा। वहीं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे ट्विटर और फेसबुक पर एक करगिल युद्ध से संबंधित तस्वीरें और सूचनाएं पोस्ट की जा रही हैं। एक अधिकारी ने कहा, “युद्ध के दौरान बहादुरी के कामों पर कार्यक्रम, डॉक्यूमेंट्री और टीवी सीरीज की योजना बनाई जा रही है”। ये भी पढ़े-वर्ल्ड कप में मैच फिक्सिंग? पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर ने लगाए गंभीर आरोप मचा हड़कंप

 

 

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