यूपी में दिल्ली के निर्भया कांड जैसी खौफनाक घटना, सुनकर पुलिस के भी होश उड़े

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उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा सूबा है । इसे धर्म की नगरी भी कहते हैं, लेकिन अब ये धर्म की नगरी बिगड़ चुकी है। इस समय योगी आदित्यनाथ राज्य के कर्ताधर्ता हैं। उन्हीं के राज्य के कानपुर देहात के सट्टी थाना क्षेत्र में एक गांव है, जहां पर रेप का मामला सामने आया है और इस मामले ने दिल्ली की निर्भया कांड की याद दिला दी। कानपुर देहात के सट्टी थाना क्षेत्र के गांव में एक लड़की के साथ गैंगरेप किया गया। इतना ही नहीं, उसके प्राइवेट अंग में कुल्हाड़ी का डंडा भी डाला गया,  उसे जान से मारने की कोशिश भी की गई। अभी फिलहाल, रेप पीड़िता लड़की अस्पताल में भर्ती है। पुलिस ने लड़की का बयान दर्ज कर लिया है।

लड़की के मुताबिक, वे अपने घर की छत पर बैठी थी, तभी अपने आपको इलाके का दबंग कहने वाला दिपू अपने चार साथियों के साथ लड़की को पकड़कर जगंल में ले गया। उसके साथ बुरी तरीके से मारपीट की। उसके साथ इन सभी ने मिलकर गैंगरेप किया। इतना ही नहीं, उस पूरे घटनाक्रम के दौरान उसके प्राइवेट पार्ट में कुल्हाड़ी का डंडा भी डाला गया और उसे उसी हालत में छोड़कर दिपू और उसके साथी वहां से भाग गए।

इसी बीच, जब मामला प्रकाश में आया और पुलिस के पास पहुंचा तो पुलिस ने अपनी उदासीनता का ही परिचय दिया। पुलिसवालों ने बिना जांच-पड़ताल किए, मामला महज मारपीट का कहकर दर्ज कर लिया, लेकिन जब पीड़िता को अस्पताल में भर्ती करवाया गया और उसकी मेडिकल जांच की गई और रिपोर्ट में रेप का मामला सामने आया, तब जाकर पुलिस सक्रिय हुई।

इतना ही नहीं, इस इबारत के आगे की दास्तान और भी ज्यादा खौफजदा है। पीड़िता की मां ने बताया कि अगर समय रहते पुलिसवालों ने पहले ही कोई कार्रवाई की होती तो आज हमें ये दिन देखना ही नहीं पड़ता। पीड़िता की मां के मुताबिक, इससे पहले उनकी छोटी बेटी के साथ भी रेप हुआ था, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। जब पीड़िता की मां पुलिस के पास पहुंची तो पुलिस ने उन्हें डांटकर भगा दिया। गरीबी और कोई पुहंच न होने के कारण पीड़िता की मां ने इस पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डालना ही मुनासिब समझा, लेकिन ज्यादा दिन ही नहीं बीते थे कि की उनकी बड़ी बेटी के साथ भी इससे भी ज्यादा भयावह घटना को अंजाम दिया।

वहीं, पुलिस का लगातार कहना यही है कि हम इस पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। पीड़िता और उनकी मां के बयान ने पुलिसकर्मियों के रवैयों पर गंभीर सवाल उठा दिए हैं। इसके साथ ही प्रशासन व्यवस्था पर संजीदा सवाल खड़े हो गए हैं। अब ऐसे में एक अहम सवाल ये खड़ा होता है कि आखिर कह तक सूबे में इस तरह की घटना बदस्तूर जारी रहेगी। आखिर इस पर अकूंश कब लगेगा।

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