ये है बरसाना की लट्ठमार होली, जब पुरुषों को पीटती हैं महिलाएं…जानिए खास बातें

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बरसाना में एक हफ्ते पहले ही होली खेलनी शुरू कर देते है। कहते है कि ब्रज की होली की बात ही कुछ अलग होती है। यहां होलाष्टाक के साथ ही होली का धूम देखने की लगती है। वही ब्रज के बरसाना और नंदगांव में होली सबसे अनोखी होती है। क्योंकि  यहां लट्ठमार होली खेली जाती है। यहां कि लट्ठमार होली की पंरपरा सदियों से चली आ रही है।

यहां कि लट्ठमार होली केवल आनंद के लिए ही नहीं, बल्कि यह नारी सश्क्तीकरण की भी प्रतीक मानी जाती है।      इसके पीछे की कहानी श्रीकृष्ण से जुड़ी है। श्रीकृष्ण महिलाओं का सम्मान करते थे और मुसीबत के समय हमेशा उनकी मदद करते थे। लट्ठमार होली में श्रीकृष्ण के उसी संदेश को प्रदर्शित किया जाता है। थोड़े से चुलबुले अंदाज में महिलाएं लट्ठमार होली में अपनी ताकत का प्रदर्शन करती हैं। ब्रज की लट्ठमार होली को खेलने और देखने देश के कोने कोने से लोग यहां आते है। यही नहीं विदेश से भी कई लोग हर साल यहां आते हैं।

बरसाने की ग्वालों और नंदगांव की गोपियों के बीच यहां लट्ठमार होली होती है। इसमें महिलाएं युवको को लट्ठ मारती है। और युवक उपर छतरीनुमा चीज रखकर बचाव करते है। बरसाना और नंदगांव की होली, आज भी ब्रज में भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी के पवित्र प्रेम की कहानी की प्रतीक मानी जाती है। ब्रज में होली का अलग ही रंग देखने को मिलता है. कहीं रंग, गुलाल तो कहीं लड्डू और कहीं लठ्ठमार होली का हुड़दंग होता है। नंदगांव और बरसाने के लोगों का विश्वास है कि होली का लाठियों से किसी को चोट नहीं लगती है।

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