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मायावती के लिए मुश्किल खड़ी हो गई, दरकने लगा है दलित वोट बैंक

लोकसभा चुनाव के लिए सपा-बसपा गठबंदन जोरों-शोरों से तैयारियों में लगा है, लेकिन अब मायावती के सामने दलित वोट बैंक एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रहा है. तारीखों की घोषणा के बाद अब बसपा टिकट बांट रही है, लेकिन पार्टी के बड़े नेताओं और अनुभवी नेताओं के टिकट भी कट रहे हैं. इन चेहरों की जगह उन लोगों को टिकट दिए जा रहे हैं जो हाल ही में बसपा में शामिल हुए हैं.

दलित वोट बैंक दरकने लगा है

पार्टी सर्किल में अब ये खुलेआम माना जा रहा है कि उम्मीदवारों के चयन के लिए धनबल को तरजीह मिल रही है और अगर ऐसा है तो क्या मायावती अपनी पिछली गलतियों से कुछ नहीं सिख रही है. माना जा रहा है कि कई दलित नेताओं की नाराजगी भी देखने को मिल रही है. तो क्या सच में मायावती दलित वोट बैंक के समीकरण को सही मायनों में समझ नहीं पा रही. या फिर वो कुछ और ही सोच रही है. जानकार बताते हैं कि अगर मायावती कांशीराम के रास्ते पर चले और उसी तरह से काम करें तो महज यूपी ही नहीं बल्कि, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में भी वो बड़ी ताकत बनकर उभर सकती है.

गौरतलब, है कि सपा-बसपा का प्रदेश में गठबंधन है. जनवरी महीने में जब दोनों पार्टियों ने गठबंधन का ऐलान किया तो गाजियाबाद से लेकर पूर्वी छोर तक माया और अखिलेश के नारे थे. बड़े-बड़े पोस्टर लगे थे, लेकिन अब मायावती के सामने दलित वोट बैंक दरकने लगा है. ये भी पढ़ें: बीजेपी के टिकट पर इस जगह से चुनाव लड़ सकते हैं कुमार विश्वास! ट्विटर पर दी ये प्रतिक्रिया

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