लोकसभा चुनाव..यूपी के इस हिस्से में छिपी है देश की सत्ता की चाबी..यहां सभी पार्टियों की नजर

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इस बार के लोकसभा चुनाव की जीत की चाबी उत्तर प्रदेश में छिपी हुई है। इसलिए तो सभी राजनीतिक दलों ने अपने अपने योद्धा मैदान में उतार दिए है। वही गुरुवार को मेरठ में रैली कर प्रधानमंत्री ने भी इस जंग का आगाज कर दिया है। ये साफ तौर पर देखा जा सकता है कि इस बार दिल्ली के राजदसिंहासन की चाबी पूर्व उत्तर प्रदेश में छिपी है। इस बार चुनावी युद्ध का बिगुल बज चुका है। यूपी पर सभी पार्टियों की पैनी नजर है पूर्वी यूपी ने सीएम योगी आदित्यनाथ, अखिलेश यादव और प्रिंयका गांधी ने अपना पूरा जोर इस बार के लोकसभा चुनाव में लगा दिया है।

वही अगर देखा जाए तो आजमगढ़ से पहली बार इस इलाके से मैदान में उतरे है। जहां लोकसभा की 35 सीटें आती है। बात करे साल 2014 और 2017 में हुए दोनों लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अपना कब्जा किया था। 2014 में तब अखिलेश के पिता और समाजवादी पार्टी के संस्थाेपक मुलायम सिंह यादव आजमगढ़ से 60 हजार वोटों से जीते थे।

अखिलेश के खिलाफ निरहुआ को टिकट मिल सकता है। बता दें कि बीजेपी ने अभी यहां से अपने उम्मीखदवार के नाम का ऐलान नहीं किया है। आजमगढ़ में एक बड़ी आबादी यादव और मुस्लिमों की है, इसलिए जातिगत गणित अखिलेश यादव के पक्ष में है। निरहुआ पड़ोस के गाजीपुर जिले के रहने वाले हैं और बीजेपी को आशा है कि उनकी स्टा र छवि को भुनाकर आजमगढ़ में कमल खिलाया जा सकता है।

पूर्वी उत्तर प्रदेस की हालत बहुत ही खस्ता है। इन क्षेत्रों में काफी गरीबी औऱ पिछड़ापन है। वही योगी सरकार के आने के बाद इन क्षेत्रों पर खासा ध्यान दिया जा रहा है। 1980 के दशक में कांग्रेस के पतन के बाद बीजेपी ने धीरे-धीरे पूर्वी यूपी पर अपना कब्जा कर लिया।

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