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तो इस बार दिल्ली में ‘मोदी सरकार’? केजरीवाल-राहुल को पहले ही लगा झटका!

लोकसभा चुनाव के करीब आने के साथ ही बीजेपी के लिए राहत की खबर है। दरअसल कांग्रेस-आप के चुनावी गठबंधन नहीं हो पाया है। जिसके बाद आगामी लोकसभा चुनावों में दिल्ली में बीजेपी को सातों सीटों पर जीत सुनिश्चित नजर आ रही है। कांग्रेस और आप के समीकरण बनने से पहले बीजेपी के नेता भी सभी सीटों पर कड़ा मुकाबला होने की बात मान रहे थे। हालांकि अभी भी पार्टी के नेताओं का कहना है कि सत्ता ही होड़ में दोनों पार्टियां कभी भी गठबंधन कर सकती हैं।

फिलहाल, बीजेपी अभी भी सातों सीटों पर प्रत्याशियों की अपेक्षा कमल का निशान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही प्रत्याशी मानकर प्रचार में जुटी है। पार्टी नेता भले ही ऊपरी तौर पर किसी से भी मुकाबला न होने का तर्क देते रहे हो। लेकिन, अंदरूनी तौर पर उनका मानना था कि अगर कांग्रेस और आप के बीच गठबंधन हो गया तो कड़ा मुकाबला होगा और सात सीटों पर जीत मुश्किल है।

गठबंधन को देखकर सातों मौजूदा सांसदों के नामों में भी बदलाव की बात चल रही थी, ताकि जिन सीटों पर सांसदों का कामकाज ठीक नहीं रहा उन पर प्रत्याशी बदले भी जा सके। लेकिन इस बीच कांग्रेस-आप के बीच गठबंधन न होने की सूरत में बीजेपी ने राहत की सांस ली है। पार्टी के मुताबिक कांग्रेस प्रत्याशी ही आप के प्रत्याशियों के वोट बैंक में सेंध लगाएंगे। जिसका सिधा फायदा बीजेपी के उम्मीदवार को होगा।

बता दे कि दिल्ली विधानसभा चुनावों के बाद समीकरण बदले हैं और कांग्रेस की हालत में पहले के मुकाबले भी सुधार आया है। आम आदमी पार्टी के करीब 10 से 15 प्रतिशत मतदाता वापस कांग्रेस की तरफ झुका है। वही बीजेपी का मानना है कि कांग्रेस जितना आप के मतदाताओं में सेंध लगाएगी, उतना ही फायदा बीजेपी को होगा।

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