तमिलनाडु के मंदिर में प्रसाद में बंटती है मटन बिरयानी, जानें क्या है कहानी

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देश में खेती या फसलों के कारण कई किसानों ने आत्महत्या की है। जिसमे राजनीति भी खूब हुई है। लेकिन दक्षिण में किसानो की तस्वीर और कहानी कुछ अलग है। दरअसल तमिलनाडु के मदुरै में वड़क्कमपट्टी और कल्लीगुड़ी जैसे कुछ ऐसे गांव हैं जहां कई किसान अब होटलों के मालिक बन गए। हालांकि यहां किसान जो अब होटल मालिक बन चुके है वह अपने काम में दो चीजों का सबसे ज्यादा ध्यान रखते है। पहली यह कि ग्राहकों को स्वादिष्ट नॉन वेज भोज परोसा जाए और दूसरा कि अपने होटलों का नाम अपने कुलदेवता मुनियांदी के नाम पर रखा जाए।

आपको बता दें कि पहला मुनियांदी होटल की शुरूआत 1937 में हुई थी। जिसे गुरुसामी नायडू ने शुरू किया था। इसके नायडू के ही एक करीबी दोस्त ने भी कल्लीगुड़ी और विरुधुनगर में होटल खोले।
आपको बता दे कि शनिवार को वड़क्कमपुटी में दो दिवसीय मुनियांदी फेस्टिवल खत्म हा है। जिसमे आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, पुडुचेरी और तमिलनाडु के कई मुनियांदी होटल मालिक ने हिस्सा लिया था। इस दौरान सुबह करीब 8,000 लोगों ने फेस्टिवल में हिस्सा लिया। जिसमे प्रसाद के तौर पर मटन बिरयानी खाई बांटी गई।
चेन्नई में मुनियांदी होटल चलाने वाले एस राजगुरु ने बताया कि हमारे लोग इन होटल्स में काम करते हैं, जो अधिकतर उनके रिश्तेदारों द्वारा ही चलाए जाते हैं। जब वे काम सीख जाते हैं तो वे बाहर जाकर अपना खुद का होटल खोल लेते हैं। उनके रिश्तेदार इसमें उनकी मदद करते हैं।’

राजविलास एक होटल के मालिक है। उनका कहना है कि यह फेस्टिवल एक मौका होता है जब हमारे पास समाज को कुछ लौटाने का मौका होता है। इसके लिए हम रोजाना पहले कस्टमर से मिलने वाली रकम को अलग रखते रहते हैं।’ रामासामी अपने इष्टदेव मुनियांदी के नाम पर होटल का नाम नहीं रख पाए क्योंकि इसी इलाके में पहले से उनका एक साथी ग्रामीण इसी नाम से एक होटल चला रहा था।

प्रसाद बनाने के लिए जहां करीब 2 क्विंटल चावल का इस्तेमाल किया गया तो वहीं 100 बकरों और 600 मुर्गों की कुर्बानी दी गई। इस प्रसाद को आसपास के गांव से आए लोगों में बांटा गया।

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