प्रयागराज कुंभ में महिला अघोरी, संन्यास लेने के बाद भी बेटी से मिलने जाती हैं…जानिए क्यों

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Mahila-Aghori

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में इन दिनों कुंभ की धूम है। जहां एक तरफ करोड़ो की संख्या में संगम की नगरी में लोग पहुंचे है तो वही भारी संख्या में साधु- संत भी यहां मौजूद है। लेकिन इस बार कुंभ में अघोर अखाड़े ने भी हिस्सा लिया। जो एक आकर्षण का केंद्र बना । इसी कड़ी में महिला अघोरी ने कुंभ और अघोरी जीवन से जुड़ी कई बातें बताई। जिसमे किस तरह इन्होने साइंस का कनेक्शन निकाला है, वो भी आप देखिए।

दरअसल महिला अघोरी का नाम प्रत्यंगीरा हैं उनका कहना है कि अघोर भी विज्ञान की तरह है और इस जीवन में भी विज्ञान की मदद से शिव की साधना करते है। उन्होने बताया कि अघोरी बनने के लिए कुछ क्वालिफिकेशन भी होनी चाहिए। जो हम सबको सिखनी होती है। जिसके लिए हमे कड़ी मेहनत और परिश्रम करना पड़ता है।

इसके आगे क्वालिफिकेशन का बताते हुए अघोरी प्रत्यंगीरा ने बताया कि आप ईश्वर की साधना में इतना लीन रहें कि आपको कुछ और दिखाई न दे? आपको सिर्फ शांति की तलाश हो? सिर्फ ईश्वर की तलाश हो? आपको सिर्फ ईश्वर का ही ध्यान होना चाहिए। सबसे बड़ी बात अघोरी को स्वार्थी नहीं होना चाहिए।

वही परिवार पर अघोरी ने कहा कि अखाड़ा ही उनका परिवार है। लकिन हां उनकी फैमिली सपोर्टिग है। लोक कल्याण का काम करने के लिए सपोर्ट होना चाहिए, तो भगवान ने मुझे अच्छी फैमिली दे दी। अपने गुरु को उन्होंने अपना भगवान बताया। इसके आगे परिवार में उनकी 10 साल की बेटी है और उनके पति हैं जो हैदराबाद में रहते हैं और कभी कभी उनसे बात भी हो जाती है।

अघोरी जीवन पर उन्होने कहा कि हमारी जो साधना है, वो सब कुछ गुप्त है। जीवन के किसी भी क्षेत्र में 100 परसेंट परफेक्ट लोग नहीं होते हैं। अघोर के क्षेत्र में भी यही स्थिति है। कुछ लोग गलत हो सकते हैं, परंतु अच्छे लोग भी हैं। महिला अघोरी ने बताया कि इन सब गलतफहमियों को दूर करने के लिए ही उनके गुरु ने यह योजना बनाई कि अघोर अखाड़ा भी प्रयागराज के कुंभ में हिस्सा लेगा। हम इस क्षेत्र में इन सभी भ्रांतियों को दूर करने के लिए आए हैं। अघोर अखाड़े के कुंभ आने का कारण ही यही है कि हम लोग अघोरियों के बारे में समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करना चाहते हैं।

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