Friday, February 3, 2023

पहली ही रेस में बीजेपी से पिछड़ी कांग्रेस, मोदी के मास्टर स्ट्रोक से राहुल चारों खाने चित

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लोकसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद देश की राजनीति चरम पर है। हर पार्टी अपनी अपनी रणनीति में लग गई है। इसके साथ राजनेताओं ने प्रचार का बिगुल भी बजा दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हो या फिर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी तमाम नेता एक-एक करके बड़ी बड़ी रैलियां कर रहे हैं। जिसमें बयानबाजी और आरोप प्रत्यारोप का दौर भी जारी है। लेकिन चुनाव में सबसे महत्वपूर्ण चुनावी नारें होते है। जिससे पार्टी की लहर लोगों पर चढ़ती है। लेकिन नारों की इस रेस मे बीजेपी ने कांग्रेस को बुरी तरह पछाड़ दिया है। या फिर कांग्रेस ने पहले ही बीजेपी से हार मान ली है। क्योंकि चुनावी शोर के साथ बीजेपी के नारे ‘मोदी है तो मुमकिन है’ और ‘फिर एक बार मोदी सरकार’ का शोर साफ सुनाई दे रहा है। वही दूसरी तरफ कांग्रेस के खेमे में इस वक्त सन्नाटा छाया है। जो कांग्रेस की हार को चिल्ला चिल्ला कर साबित कर रहा है।

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कांग्रेस के साथ सपा- बसपा भी हारे

चुनावी नारों में बीजेपी से सिर्फ कांग्रेस ही नहीं हारी है। जहां एक तरफ बीजेपी कांग्रेस को चिड़ाते हुए गाजे- बाजे के साथ अपने नारो के साथ ठोल पीट रही है। तो वही कांग्रेस  पार्टी सिर्फ एक नारा गाती हुई नजर आ रही है। ‘23 मई बीजेपी गई’। जो कांग्रेस के लिए काफी नहीं है और न ही इस एक नारे के दम पर कांग्रेस बीजेपी को हरा सकती है। इसी तरह क्षेत्रिय दल समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी भी नारों की रेस में बीजेपी से पीछे नजर आई है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट कर एक नारा लिखा था। जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘एक भी वोट न बंटने पाए-एक भी वोट न घटने पाए’। इस नारे में अखिलेश यादव अपने गठबंधन के वोटरो को ही ज्ञान देते हुए नजर आ रहे थे। ताकि सपा- बसपा और आरएलडी का गठबंधन चुनाव में बीजेपी का सामना कर सके।

नारों का अहम रोल

आपको ये भी बता दे कि चुनाव में नारो का अपना ही महत्व होता है। चुनाव में नारो की प्रथा आज से नहीं है। 2014 के लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी ने कई नारों का उद्घोष किया था। 2014 में बीजेपी ने ‘अबकी बार-मोदी सरकार’‘अच्छे दिन आने वाले है’ ‘हर हर मोदी घर घर मोदी’ जैसे नारे दिए थे। जो लोगों को बीजेपी की छाप छोड़ने वाले साबित हुए थे। वही कांग्रेस ने भी ऐसे ही 2014 में कई नारे दिए थे। कांग्रेस ने ‘कट्टर सोच नहीं युवा जोश’ का नारा आम जनता तक पहुंचाने की कोशिश की गई, ताकि बीजेपी के सरकार में आने के नुकसान बताए जा सकें।

नारों में फंसी कांग्रेस

हालांकि चुनाव में नारे कभी कभी पार्टी को ही खतरनाक साबित हो जाते है। कई ऐसे नारे है जो पार्टी के लिए ही निगेटिव इमेज लोगों के बीच बना देते है। ऐसा ही एक बार गुजरात के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ हुआ था। इस दौरान राहुल गांधी ने विकाल पागल हो गया, गब्बर सिंह टैक्स और चौकीदार चोर जैसे नारे बीजेपी के खिलाफ दिए थे। जिसे बीजेपी ने कांग्रेस के खिलाफ ही इस्तेमाल किए थे।

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