इंजीनियर बेटी बनी सरपंच, ऐसे बदली गांव की सूरत

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praveen

देश में सरपंच तो कही है। जो अपने गांव की उन्नति के लिए काम करते है लेकिन एक इंजीनियर जब अपनी नौकरी और करियर छोड़, गांव की उन्नति के लिए सरपंच के पद पर बैठ जाए। तो उस गांव की काया सच में पलट जाती है। दरअसल हरियाणी की प्रवीण कौर भी ककराला कुचिया की सरपंच है। प्रवीण कौर ने नौकरी छोड़, गांव की उन्नति के लिए सरपंच का चुनाव लड़ा और गांव वालों ने भी उसे सर्वसम्मति से अपना मुखिया बनाया।

वही प्रवीण कौर से एक हिंदी अखबार ने इंटरव्यू में कई सवाल पूछे। इस दौरान सबसे पहला सवाल तो यही था कि वह सरपंच क्यों बनी है और शादी के बाद क्या गांव छोड़ देगी। इसके जवाब में प्रवीण ने कहा कि जब मैं छोटी थी तब गांव में पानी की निकासी, पीने के पानी सहित कई परेशानी थी। महिलाएं दूर- दराज से पानी लाती थी। साथ ही बच्चों को शिक्षा की सुविधा भी नहीं दी गई थी। इन्ही समस्या को पूरा करने के लिए आज मैं सरपंच बनी हुं।

इसके आगे प्रवीण ने कहा कि शादी के बारे में मैने अभी सोचा नहीं है। सरपंच का कार्यकाल खत्म होने के बाद ही इसपर विचार करूंगी। अभी तो मुझे गांव के लिए काफी काम करना। आने वाले पांच साल मुझे गांव को तरक्की की नई दिशा देनी है। इस समय तो शादी के बारे में मैं सोच भी नही सकती।

आपको बता दें कि प्रवीण ने सरपंच बनते ही गांव के लोगों के लिए काम करना भी शुरू कर दिया है। जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई के लिए प्रवीण ने गांव मे क्लास शुरू करवा दी है। जिसमें 60 बच्चों को पढ़ाया जाता है। दिलचस्प बात तो ये है कि इस स्कूल में प्रवीण खुद बच्चों को पढ़ाती है। जिसका नतीजा सामने ये आया कि बच्चों का स्तर बढ़ रहा है तो साथ ही बच्चों के पढने लिखने से भविष्य भी अच्छा होगा।

प्रवीण की टीम में चार महिला पंच भी हैं। पंचायत का फोकस महिला विकास पर रहता है। प्रवीण ने बताया कि महिला पंच होने से फायदा यह रहता है कि महिलाएं अपनी बात खुलकर रख सकती हैं। बेटियों को पढ़ाना हो, उनकी निजी समस्या हो या फिर कोई घरेलू विवाद, महिलाएं इन पंचों के सामने सभी समस्याएं रख सकती हैं। इससे समाधान निकालने में आसानी रहती है। प्रवीण को वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सम्मानित कर चुके हैं।

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