वैज्ञानिकों का दावा, चुंबकीय क्षेत्र हो सकता है उल्टा, धरती पर पड़ेगा गहरा प्रभाव

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Earth Magnetic Field Weak: एक तरफ कोरोना वायरस (corona virus) का संक्रमण तेजी से फैलता जा रहा है तो दूसरी तरफ वैज्ञानिकों के दावे दुनिया को डरा रहे हैं. हाल ही में वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि, धरती (Earth) की चुंबकीय क्षमता कम हो रही है और इसका प्रभाव सैटेलाइट और स्पेस क्राफ्ट पर पड़ रहा है. द इंडिपेंडेंट में छपी एक रिपोर्ट की मानें तो, वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में पाया है कि, कुछ सालों में दक्षिण अटलांटिक अनोमली के रूप में जाना जाने वाला क्षेत्र काफी बढ़ गया है. लेकिन, ऐसा क्यों हो रहा है इसकी वजह का पता नहीं चल पाया है. लेकिन, इन बदलावों की वजह से धरती पर भूकंप, सुनामी, भीषण गर्मी, आंधी-तूफान जैसी आपदाएं आ सकती हैं.

कितनी कमी आई
वैज्ञानिकों ने इसका पता लगाने के लिए यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) के डेटा का उपयोग किया जिससे पता चला कि, साल 1970 और 2020 के बीच अनोमली की क्षमता में करीब 8 फीसदी कमी आई है जबकि, दक्षिण अटलांटिक में नई अनोमली पिछले दशक में ही दिखाई दी है और हाल ही के वर्षों में इसका विकास काफी तेजी से हुआ है. वैज्ञानिकों का कहना है कि, अनोमली की जांच करने के लिए उनके पास ऑर्बिट में स्वार्म (Swarm) सैटेलाइट है. जिससे अधिक जानकारी जुटाई जा सकती है.

पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र होने वाला है उल्टा
जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसिंक्स के वैज्ञानिक ज्यूरन मैत्ज़का की मानें तो, पृथ्वी में मुख्य ड्राइविंग थिसिस में जितने भी बदलाव हो रहे हैं उन्हें समझना एक बड़ी चुनौती बन चुका है. ईएसए का मानना है कि, “जो क्षेत्र कमजोर हो रहा है वह शायद इस बात का संकेत है कि धरती का चुंबकीय क्षेत्र उल्टा होने वाला है.”Earth Magnetic Field Weak बता दें, इससे पहले जो रिपोर्ट सामने आई थी उसमें भी एक बड़ा खुलासा हुआ था कि, पृथ्वी का एक उत्तरी ध्रुव कनाडा में अपनी जगह से रूस में साइबेरिया की ओर प्रति वर्ष 50-60 किमी की शीर्ष गति से स्थान बदल रहा है.’

आखिरी बार कब हुआ था?
रिपोर्ट से मिली जानकारी के आधार पर, ”आखिरी बार चुंबकीय उत्तरी ध्रुव अपनी जगह से 7,80,000 साल पहले खिसका था.” वैज्ञानिकों के मुताबिक इन सब बदलावों के नतीजे काफी अहम हो सकते हैं क्योंकि, पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र बहुत सी भूमिकाएं निभाता है और साथ ही हवाओं और हानिकारक ब्रह्मांडीय विकिरण के प्रभावों से ग्रह की रक्षा करता है. आमतौर पर इसे धरती का रक्षा कवच कह सकते हैं.

अंतरिक्ष यान कर सकते हैं परेशानी का सामना
रिपोर्ट का यह भी कहना है कि, दक्षिण अटलांटिक अनोमली की वजह से जो सैटैलाइट्स धरती की परिक्रमा करती हैं उनमें भी दिक्कतें आ रही हैं. एंजेसी का कहना है कि, इन दिक्कतों की वजह से अगर कोई अंतरिक्ष यान अगर इस क्षेत्र में उड़ान भरता है तो विमान में तकनीकी खराबी हो सकती है. हालांकि, ऐसा होगा ये स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता. मगर इतना जरूर है कि, वैज्ञानिकों के इस दावे के बाद सतर्क रहना जरूरी है.

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