इस गांव में होली नहीं खेलते लोग, 200 साल पहले मिला था श्राप

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देश में जगह- जगह रंगों के त्यौहार होली को बड़े धूमधाम और हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है. इस दिन लोग एक – दूसरे को रंग लगाकर खुशियां बांटते हैं. झूठ पर सच की जीत का ये त्यौहार होली देश के हर राज्य, प्रांत, कसबे में मनाया जाता है. और लोगों के चेहरे होली के विभिन्न रंगों में रंग जाते है. लेकिन, एक ऐसा भी गांव है जहां पर 200 सालों स किसी ने होली नहीं खेली है.ये गांव गुजराज के बनासकांठा जिले में स्थित है.

यहां के लोग ऐसा करने के पीछे एक श्राप को बताते हैं. यहां होली का नाम सुनते ही लोगों के चेहरे पर मातम पसर जाता है.आपकों बता दें इस गांव का नाम रामसन गांव है, जिसका पौराणिक नाम “रामेश्वर” है. बताया जाता है कि राम ने भी यहां आकर रामेश्वर भगवान की पूजा की थी.गांव का रामेश्वर के नाम पर रखा गया है.इस गांव जनसंख्या लगभाग 10 हजार की हैं. बताया जा रहा है कि इसी ऐतिहासिक गांव में 200 साल पूर्व पहले दूसरे गावों की तरह इस गांव में भी होलिका दहन कर होली पर्व मनाया जाता था.

लेकिन, अचानक ही गांव में भीषण आग लग गई और गांव के कई घर इस आग की चपेट में खाख हो गए. आखिर अचानक आग क्यों लगी? इसके पीछे मान्यता ये है कि उस समय के गांव के राजा ने साधू-संतो को अपमानित किया था और क्रोधित साधुओं ने श्राप दिया था की होली के दिन गांव में आग लग जाएगी. जिसके बाद होली पर्व पर गाव में आग लग गई थी.ये भी पढ़ें:दिल्ली में अकेली पड़ी शीला, कांग्रेस-AAP का गठबंधन तय

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