बाबा लगाएंगे राजनेताओं का बेड़ा पार, दिलाएंगे सत्ता का चाभी

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धर्म और राजनीति की जुगलबंदी बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। जिसके वजह से हमें ये देखने को मिल रहा है कि अब राजनीति की कई पार्टियां बाबाओं के आगे नतमस्तक होती है जिसका सबसे बड़ा कारण वोट बैंक है। राजनीति में ऐसे कई बाबा शामिल है। जो धर्म की आड़ में पार्टी के लिए पूरा वोट बैंक तैयार करते है। जिसकी वजह से आज ऐसे कई बाबा है जो काफी सुर्खियों में रहते है। जिसके कारण रानजीति और सियासत भी इनके आगे नाचती हुई नजर आती है। तो आइए आज हम आपको ऐसे बाबाओं के बारे में बताते है जो धर्म के साथ साथ राजनीति में भी अपना रूतबा रखते है।

योग गुरु बाबा रामदेव
बाबा राम देव महेंद्रगढ़ जिले के गांव सैद अलापुर के निवासी है जो आज एक राष्ट्रीय पहचान बन गए है। रामदेव महेंद्रगढ़ मे अध्ययन के बाद रेवाड़ी के घासेड़ा –किशनगढ़ में एक गुरुकुल को अपनी कर्मस्थली बना चुके है। यहां पर मौजूद गुरुकुल आज भी बाबा रामदेव के निर्देशों पर चलता है। इतना ही नहीं बाबा रामदेव राजनीति में कितनी भूमिका रखते है। ये भी बाबा ने पिछले विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में साबित कर चुके है। इसके साथ ही पतंजली के जरीए बाबा मतदाताओं से सीधा जुड़ते है। जिसका असर दिल्ली समते तमाम राज्यों के मतदाताओं पर पढ़ता है।

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चंद्रास्वामी
चंद्रस्वामी रानजीति बड़ा चेहरा माने जाते है। इसका अंदाजा हम इस बात से लगा सकते है कि वह भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हाराव के सबसे करीबी सलाहकार माने जाते थे। वही कहानियों में ये भी कहा जाता है कि जब तक पीवी नरसिम्हाराव प्रधानमंत्री रहे थे तब तक उन्हे उनसे मिलने के लिए किसी भी तरह के अप्वाइंटमेंट की जरूरत नहीं पड़ती थी। हालांकि चंद्रस्वामी पर ही राजीव गांधी की हत्या के षड्यंत्र का आरोप है। इसके अलावा हथियारों की दलाली, हवाला का कारोबार, विदेशी मुद्रा अधिनियम का उल्लंघन करने जैसे कई संगीन आरोप इन पर है।

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आसाराम
आसाराम शक्तिशाली बाबाओं में से एक माना जाता है। जिसकी शिष्यों की संख्या करोड़ो में है। आसाराम के छोटे बड़े 450 से ज्यादा आश्रम है। जहां पर नेता भी सर झुकाते हुए नजर आते थे। लेकिन लड़कियों से यौन शोषण करने के आरोपो के बाद आसाराम का दबदबा कम हुआ। आसाराम पर जांच शुरू हुई थी तो उसकी आंच बेटे नारायण साईं पर भी पहुंची। जिसके चलते कोर्ट ने भी दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई।

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गुरमीत राम- रहीम
गुरमीत राम- रहीम बाबाओं की तिलस्मी दुनिया को अनोखा चेहरा था। जो था तो धार्मिक दुनिया में। लेकिन मॉर्डन उसका लिबाज होता था। गुरमित राम रहीम अपने डेरे में ही रहते हुए फिल्में और सगींत में हाथ आजमाया करता था। साल 2014 में उसका पहला म्यूजिक एलबम हाइवे लव चार्जर के नाम से रिलीज हुआ। जिसके बाद और भी कई फिल्म सामने आई। हालांकि इन सबके बीच वह लंबे समय से राजनीति मे उतरने की कोशिश कर रहा था। लेकिन यौन शोषम के आरोप में अब वह जेल में बैठा है।

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सतपाल महाराज
सतपाल महाराज व उनके प्रमुख शिष्य चुनावों के दौरान कई बार हरियाणा में आ चुके हैं तथा मतदाताओं को राष्ट्रीय हित में मतदान की अपील करते रहे हैं। कांग्रेस में रहते हुए सतपाल महाराज जहां केंद्र में मंत्री रहे वहीं भाजपा ने पहले उनकी पत्नी अमृता रावत व बाद में खुद महाराज को उत्तराखंड में मंत्री पद का जिम्मा सौंपा। फिलहाल भाजपा ने सतपाल महाराज को स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल किया है।

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