यूपी के बस्ती में आम आदमी पार्टी ने भरी हुंकार, अब होगा 10 करोड़ के बंदरबांट का खुलासा

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जनता पैसा जनता के बीच तो आया लेकिन गया कहां ? बस्ती में जनता का पैसा टूटी छतों से बारिश बनकर बह रहा है, जनता का पैसा उखड़ती टाइल्स से निकल रहा है। हां कुछ ऐसा ही समझ लीजिए। आम आदमी पार्टी को ये बड़ा मुद्दा मिल गया है और वो इस लड़ाई को बहुत आगे तक ले जाना चाहती है। जाहिर सी बात है कि परत दर परत भ्रष्टाचार की कलई खुलना जरूरी है। हम बात कर रहे हैं बस्ती के पंडित अटल बिहारी वाजपेई ऑडिटोरियम की। आज अटल जी जिंदा होते, तो इस ऑडिटोरियम की हालत देखकर उन्हें भी रोना आ जाता। आम आदमी पार्टी ने इस 10 करोड़ की बंदरबांट का खुलासा करने का ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा है। अब आपको सिलसिलेवार तरीके से बताते हैं कि ये घोटाला कितना बड़ा है। यकीन मानिए ये जानकर आपके भी होश उड़ जाएंगे। सबसे पहले सबसे बड़ा आरोप।

1- आरोप है कि इस भवन के निर्माण के लिए कागजों में ज्यादा भुगतान दिखाया गया लेकिन कम रेट वाले पंखे, कुर्सियां खरीदकर भ्रष्टाचार की पहली सीढ़ी चली गई।

2- आरोप तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ राजशेखर पर भी लगा है। उन पर आरोप है कि उन्होंने नियम तोड़कर 1.46 करोड के प्रस्ताव को मंजूरी दी। गौर करने वाली बात ये है कि ये मंजूरी तब दी गई, जब पैसा था ही नहीं। ज्यादा भुगतान दिखाकर रस्ते का माल सस्ते में उठाया गया और खूब मौज उड़ाई गई।

3- सबसे बड़ा आरोप ये है कि आरसीसी छत की जगह एस्टर सीट लगाकर काम चलाया गया। अब दीवारों पर लगी टाइल्स उखड़ने लगी हैं। टाइल्स को नट बोल्ट लगाकर कसा गया था।

4- आरोप ये भी है कि पहली बरसात में ही ऑडिटोरियम की छत टपकने लगी थी। इसके बाद भी तत्कालीन जिलाधिकारी ने उसी संस्था से काम करवाया, जिसने ये घपला किया था। यानी सीधा का कनेक्शन जिलाधिकारी और कार्यदायी संस्था के बीच नज़र आ रहा है।

अब आम आदमी पार्टी का सवाल है कि तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ राजशेखर ने आखिर किस नियम के तहत 1.46 करोड़ के प्रस्ताव को मंजूरी दी ? करीब 10 करोड़ की लागत से बने ऑडिटोरियम का निर्माण करने वाली संस्था का नाम समाज कल्याण निगम है। ऐसे में यूपीवार्ता का सवाल है कि आखिर अब क्यों जिले के हुक्मरान मौन बैठे हैं? सांसद से लेकर विधायक और तत्कालीन जिलाधिकारी के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही? आम आदमी पार्टी ने इस भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई है और माना जा रहा है कि इसमें परत दर परत बड़े खुलासे हो सकते हैं। ये भी पढ़ेंः- बस्ती जिले में पुलिस के इकबाल पर सवाल, आंख के सामने गांजे की तस्करी, दबाव पड़ा तो महिला को भेजा जेल

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