किसान की बेटी ने पहले प्रयास में पास की UPSC परीक्षा, 257वीं रैंक लाकर परिवार का बढ़ाया गौरव

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यूं तो हर कोई सरकारी नौकरी की चाहत रखता है, लेकिन इस चाहत को बरकरार रखने के लिए आपको अपने सपनों से लड़ना होगा। यूपीएससी की चाहत रखने वाले लोग इस बात को बखूबी जानते हैं, कि इस परीक्षा को पास करने के लिए कितने पापड़ बेलने पड़ते हैं। ऐसी कोई किताब नहीं, करेंट अफेयर, अखबार नहीं जिसे लोग पढ़ने से चूकते हों लेकिन हर कोई इस परीक्षा में पास नहीं हो पाता। दरअसल यूपीएससी ने हाल ही में 2019 परीक्षा का रिजल्ट जारी किया है। चार अगस्त को जारी हुए इस रिजल्ट में एक किसान की बेटी ने पहली बार में यह परीक्षा पास कर ली। उत्तराखंड के चमोली जिले की प्रियंका दीवान ने सीविल परीक्षा में 257 रैंक पाकर अपने परिवार और जिले का नाम रौशन कर दिया। जिसके बाद से परिवार और गांव में खुशी की लहर देखने को मिली। अपनी इस सफलता के बाद प्रियंका अब इलाके की लड़कियों के लिए रोल मॉडल बन गई हैं.

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बता दें कि उत्तराखंड के चमोली जिले के देवाल ब्लॉक के रामपुर गांव में रहने वाली प्रियंका दीवान एक मध्यम वर्गीय परिवार से आती हैं। उनके पिता राम दीवान गांव में ही किसानी करते हैं. वह भी पिता के साथ कभी-कभी हाथ बंटाती थी। प्रियंका दीवान का परिवार इतना आर्थिक सम्पन्न नहीं था कि वह अपनी पढ़ाई किसी प्राइवेट स्कूल से कर पातीं। लिहाजा उन्होंने गांव के ही सरकारी स्कूल से अपनी 10 वीं की पढ़ाई पूरी की। हालांकि प्रियंका पढ़ने में काफी होशियार थीं उन्होंने 10वीं में अच्छे अंक प्राप्त किए। जिसके बाद उन्होंने अपने पिता से अनुरोध किया कि उन्हें भी किसी अच्छे स्कूल में दाखिला मिल जाए तो वह आगे इस पढ़ाई को जारी रखेंगी। पिता पढ़ाई का महत्व समझते थे, इसलिए उन्होंने अपनी बेटी का रास्ता आसान करने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया. फलस्वरूप ग्रेजुएशन के लिए प्रियंका गोपेश्वर गईं।

प्रियंका को UPSC की प्रेरणा उनके कॉलेज से ही मिली. दरअसल एक दिन चमोली जिले के डीएम एसए मुरुगेशन उनके कॉलेज के दौरे पर आए थे. उनके स्वागत के लिए जिस तरह से पूरे कॉलेज परिसर को सजाया गया था. उसने प्रियंका को प्रभावित किया. प्रियंका ने ठान लिया कि वो भी इस परीक्षा के लिए कड़ी मेहनत करेंगी और अच्छे अंकों से पास होंगी। खास बात यह है कि उन्होंने पहली बार में ही UPSC की परीक्षा पास कर ली। जो वाकई काबिले तारीफ है।

हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक यूपीएससी परीक्षा पास करने के बाद वह दो दिनों तक अपने परिवार को यह खुशखबरी नहीं दे पाईं। चूंकि वो इन दिनों देहरादून के एक कॉलेज से वकालत की पढ़ाई कर रही हैं और उनका परिवार 145 किमी दूर रामपुर गांव में हैं। जहां न तो कथित तौर पर गांव में उचित सड़क है, न ही बिजली की आपूर्ति,

और न ही मोबाइल कनेक्टिविटी तो ऐसे में उन्हें यह सूचना देने में दो दिन का समय लग गया। हालांकि (TOI) के अनुसार जब उनके पिता दीवान राम को पता चला कि उनकी बेटी ने UPSC में 257 वीं रैंक हासिल की है, तो खुशी के मारे उनका ठिकाना नहीं रहा। पिता के आंखें आंसूओं से भर आई थी। चूंकि अपनी बेटी को कड़ा संघर्ष करते हुए अपनी आंखों से देखा था। आज पूरा गांव, परिवार खुशी से झूम रहा है।

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