बिहार में लगे ‘नीतीश गो बैक’ के नारे…108 बच्चों की मौत से पसरा मातम

नीचे जो तस्वीर लगी है। उसे आप एक बार ध्यान से देखिएगा। इस तस्वीर में आपको बिलखती हुई ममता और तड़पता हुआ मासूम दिखेगा। इस समय बिहार में त्राहीमाम-त्राहीमाम मचा हुआ है। एक पल के लिए हर किसी का दिल दहल जाएगा, अगर उसकी नजर इस तस्वीर पर पड़ेगी। कोई आधिकारिक सूचना तो नहीं है। महज कथित तौर पर कहा जा रहा है कि अभी तक 108 बच्चों की मौत इस चमकी बुखार के जद में आने से हो चुकी है। इतना ही नहीं, ये आंकड़ा दिन व दिन, घंटे दर घंटे बढ़ता ही जा रहा है। अस्पतालों में जाने से महज आपको रोती बिलखती हुई मां देखेगी, जो ऊपर वाले से फरियाद कर रही है कि कैसे भी हो उनका बच्चा बच जाए। ये भी पढ़े :सियासी गलियारों में मचा हड़कंप ;देर रात को हुई नीतीश-प्रणब की सीक्रेट मीटिंग..बन गई बात!वहीं, अब मरीजों के तीमरदारों का आक्रोश फूट चुका है। अस्पतालों की व्यवस्था चरमराई हुई है। मरीजों के लेटने के लिए बेड तक की भी व्यवस्था नहीं है। नौबत तो यहां तक पहुंच चुकी है कि अब मरीजों को जमीन पर लिटाया जा रहा है। उपचार की भी उचित व्यवस्था अस्पतालों में देखने को नहीं मिल रही है। डॉक्टरों की भी उचित व्यवस्था नहीं है। बताया जा रहा है कि मरीजों के अनुपात में डॉक्टरों की संख्या कम है। अस्पतालों की व्यवस्था बदहाल है। अस्पतालों में पानी तक भी व्यवस्था नहीं है। अस्पताल बुनियादी जरूरतों के अभाव से ग्रस्त है।

‘वापस जाओं’ नीतीश कुमार ‘वापस जाओ
बहुत देरी कर दी इन्होंने। अगर देरी न की होती है तो संभावना थी कि शायद इन्हें ये नारे न सुनने पड़ते। नीतीश कुमार जैसे ही अस्पताल में अपनी नैतिक जिम्मेदारी पूरी करने के बाबत पहुंचे तो ठीक वैसे ही नीतीश कुमार वापस जाओ के नारे लगने लगे। मरीजों के तीमारदारों का आक्रोश फूट गया। जब नीतीश कुमार ने अस्पताल में दस्तक दी। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर नीतीश कुमार को सवालिया कठघरे में खड़ा किया जा रहा है। नीतीश पर ये आरोप लग रहे हैं कि इन्होंने इस पूरे मामले को लेकर ढ़िलाई बरती, जिसका ही ये नतीजा रहा है कि अस्पताल में मौतों का सिलसिला अभी तक जारी है।

नेता आते हैं और फिर चले जाते हैं
बच्चों की मौतों का सिलसिला बदस्तूर जारी है। ममता बिलख रही है। मासूम तड़प रहा है। लेकिन, सरकार जस की तस बनी हुई है। सूबे में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की क्या स्थिति है। इस घटनाक्रम ने इसकी पोल खोल दी है। बस, अगर मरीजोंके तीमारदारों को कुछ मिल पा रहा है तो वो है नेताओ के द्वारा दिया जा रहा दिलासा। अब ऐसी परिस्थिति में सवाल खड़े हो रहे हैं। न महज राज्य के मुखिया, बल्कि केंद्र में मौजूद स्वास्थ्य मंत्री पर भी इस मामले को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। ये भी पढ़े :नीतीश का कद बढ़ाएगा ये फैसला ;बूढ़े मां-बाप की सेवा नहीं की तो हो सकती है जेल

एबीपी न्यूज़ के सौजन्य से हम आपको इस ख़बर से संबंधित वीडियो दिखा रहे हैं 

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