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पलायन के बाद वापसी करने वालों को निशाना बना रहे आतंकी, अभियान को ठेस पहुंचाने की ऐसी है साजिश

दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में हाल के दिनों में हिन्दू, सिक्खों पर हमले बढ़ गए हैं। हिन्दू, सिक्खों को निशाना बना कर उनकी हत्याएं की जा रही हैं। खुफिया एजेंसियों का कहना है कि कश्मीरी पंडितों को उनके 90 के दशक के पलायन के बाद अपनी संपत्तियों को पुनः प्राप्त करने में मदद करने के लिए जम्मू-कश्मीर प्रशासन के अभियान को ठेस पहुंचाने के इरादे से ऐसा किया जा रहा है। आतंकियों और अलगाववादियों की यह साजिश है। 7 सितंबर को लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा ने कश्मीरी पंडितों को उनकी जमीन और संपत्ति वापस दिलाने के लिए एक वेब पोर्टल को लॉन्च किया है। विभिन्न जिलों के उपायुक्तों को इसके जरिए भूमि हड़पने और अतिक्रमण की 5,600 शिकायतें प्राप्त हुई थीं। लगभग 2,200 ऐसी शिकायतें जो कश्मीरी पंडितों और अन्य द्वारा दर्ज कराई गई थीं, उसका हल निकाला जा चुका है। इन शिकायतों के पीछे कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के वापसी से है।

इनमें से ज्यादातर शिकायतें कश्मीरी पंडितों की जमीन और घरों को तीन दशक पहले या तो छीन लिए जाने या औने-पौने दामों पर बेचने की हैं। इस दौरान कश्मीरी पंडितों को जान बचाने के लिए पलायन करना पड़ा। मनोज सिन्हा ने केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन को लगभग 44,000 ‘‘प्रवासी परिवारों‘‘ की जमीन हड़पने और संपत्ति से संबंधित अन्य शिकायतों का ‘‘समयबद्ध निवारण‘‘ सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। अधिकारियों ने बताया कि इनमें से 40,142 परिवार हिंदू, 2,684 मुस्लिम और 1,730 सिख हैं। कोशिश है कि पलायन किये गये लोगों की वापसी हो। प्रशासन ने अकेले अनंतनाग जिले में केवल तीन सप्ताह में 41 ‘कनाल‘ (20 ‘कनाल‘ एक हेक्टेयर) को मुक्त कर दिया है। एक महीने से भी कम समय में दक्षिण कश्मीर जिले में दर्ज 1,000 शिकायतों में से लगभग 400 का भी समाधान निकाला जा चुका है। लगभग 95 फीसदी शिकायतें फर्जी पाई गईं।

1997 में तत्कालीन फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार ने प्रवासी अचल संपत्ति (संरक्षण, संरक्षण और संकट बिक्री पर संयम) अधिनियम नामक एक कानून पारित किया था। एक अधिकारी ने कहा कि कानून ने 90 के दशक की शुरुआत में आतंकवादी संगठनों द्वारा चुनिंदा हत्याओं के कारण जम्मू-कश्मीर से भागने के लिए मजबूर लोगों के स्वामित्व वाली संपत्तियों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था लेकिन इसे कभी भी लागू नहीं किया गया था।
खुफिया एजेंसियों का दावा है कि पाकिस्तान समर्थित लश्कर-ए-तैयबा से संबद्ध टीआरएफ द्वारा कश्मीरी पंडितों और सिखों पर हालिया हमले ‘गलत को सही करने‘ के प्रशासन के अभियान के प्रतिशोध में हैं।

आतंकी संगठन और अलगावादी कभी नहीं चाहेंगे कि कश्मीर में शांति और पलायन करने वालों की वापसी हो। आतंकी संगठन उसी को निशाना बना रहे हैं जो वापसी कर रहे हैं। जिसने पिछले साल डोमिसाइल सर्टिफिकेट के लिए आवेदकों को निशाना बनाकर अपने आगमन की घोषणा की थी। उन्हे मारा जा रहा है। एक सप्ताह के भीतर श्रीनगर में एक प्रमुख कश्मीरी पंडित व्यवसायी, एक कश्मीरी सिख स्कूल के प्रिंसिपल, उसके पंडित सहयोगी और एक प्रवासी खाद्य विक्रेता की गोली मारकर हत्या कर दी।

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