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दिल्ली। तालिबान का अफगानिस्तान पर कब्जा सिर्फ खाड़ी देशों के लिए संकट नहीं है बल्कि भारत के लिए भी मुश्किलें हैं। कश्मीर की सुरक्षा बढ़ाने पर विचार हो रहा है। अफगानिस्तान पर फिर एक नई रणनीति बनाने पर जोर दिया जा रहा है। बताया जा रहा है कि बुधवार को एक हथियारों से भरा एक ट्रक पाकिस्तान आते हुए देखा गया है। कहा जा रहा है कि इस ट्रक में पाकिस्तान द्वारा तालिबान की मदद के लिए भेजे गए हथियार ही मौजूद थे। ज्ञात हो कि तालिबान की मदद करने के लिए पाकिस्तान की आईएसआई ने बड़ी संख्या में तालिबान को हथियार दिए थे। उन हथियारों की मदद से ही अफगान सेना को तालिबान ने कम समय में ही खदेड़ दिया था। इन हथियारों को तालिबान खूब इस्तेमाल किया। अब जब अफगानिस्तान का वो मिशन पूरा हो चुका है ऐसे में तालिबान उन्हीं हथियारों को पाकिस्तान को वापस भेज रहा है। इस हथियार से भरे ट्रक की बात उजागर होने से पाकिस्तान परस्ती तालिबान की नीयत उजागर हो गयी।

जैश-लश्कर के 8000 से भी ज्यादा आतंकियो की मूवमेंट
बताया जा रहा है कि 16 अगस्त के बाद से सैकड़ों की संख्या में हथियारों से भरे ट्रकों को अफगानिस्तान-पाकिस्तान की सीमा पर देखा गया है। उन तमाम ट्रकों को पाकिस्तान में एंट्री भी लेते हुए देखा गया है। ये सभी ट्रक तालिबान के सहयोग में हथियार ले कर गये थे। खुफिया एजेंसियों के सूत्रों ने पहले भी इस बात की आशंका जताई थी कि तालिबान को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई मदद कर रही है। फगानी सुरक्षा बलों पर उन्हें हमले के लिए तैयार किया जा रहा है। पाकिस्तान से जैश और लश्कर के 8000 से भी ज्यादा आतंकियों की मूवमेंट अफगानिस्तान की तरफ जाते देखी गई थी जो तालिबान के साथ मिलकर अफगानी सुरक्षा बलों पर हमले कर रहे थे।

भारत के लिए इन हथियारों और तालिबान के बढ़त वर्चस्व ने चिंता में डाल दिया है। अब डर इस बात है कि कहीं आईएसआई इन हथियारों का इस्तेमाल कश्मीर में आतंक परस्त आतंकियों तक न मुहैया करा दे। ऐसा होने से घाटी में माहौल फिर अशांत हो सकता है और आतंकियों के हौसले बुलंद हो सकते हैं। पिछले कुछ सालों में जम्मू कश्मीर में सुरक्षाबलों के हाथों मारे गए कुछ आतंकियों के पास से अमेरिकन मेड हथियार बरामद हो चुके हैं। पाकिस्तान की इस हरकत से क्षेत्र में अशांति की स्थिति बन गयी है।

कश्मीर के लिए चिंताजनक
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने पहले इस बात की आशंका जाहिर की थी कि ये हथियार अफगानिस्तान से कश्मीर में सक्रिय आतंकियों तक पहुंचाये जा रहे हैं। अब ऐसे में जब हजारों की संख्या में अमेरिकन असॉल्ट राइफल, ग्रेनेड और कई सर्विलांस सिस्टम तालिबान के हाथ लग चुके हैं जो खतरनाक साबित होंगे। ऐसे में अब इनका भारत के खिलाफ इस्तेमाल होगा, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है।

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