निर्भया के दरिंदों की फांसी का रास्ता साफ, आखिरी हथकंडा भी हुआ नाकाम

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निर्भया गैंगरेप के दोषियों को पटियाला हाउस कोर्ट (patiala house court) ने फांसी की सजा सुनाई थी। जिसके बाद दो दोषियों ने क्यूरेटिव पिटीशन सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की थी, जिसे अब खारिज कर दिया गया है। जिससे दोषियों की फांसी का रास्ता साफ हो चुका है। अब निर्भया के चारों दोषियों को 22 जनवरी 2020 को सूली पर लटकाया जाएगा। क्यूरेटिव पिटीशन पर जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन, जस्टिस आर. भानुमति और जस्टिस अशोक भूषण की पांच जजों वाली पीठ ने सुनवाई करते हुए विनय और मुकेश की याचिका को खारिज कर दिया।

आपको बता दें, निर्भया के दोषी विनय शर्मा ने दायर की गई याचिका में कहा था कि, अकेले याचिकाकर्ता को दंडित नहीं किया जा रहा है, बल्कि आपराधिक कार्यवाही के कारण उसका पूरा परिवार पीड़ित हुआ है। जबकि, इसमें परिवार की कोई गलती नहीं है इसके बावजूद उन्हें समाजिक प्रताड़ना और अपमान का सामना करना पड़ा है।

जानकारी के लिए बता दें, पटियाला हाउस कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए चारों दोषियों के खिलाफ डेथ वारंट जारी कर दिया था। जिसके मुताबिक, दोषियों को 22 जनवरी की सुबह 7 बजे फांसी दे दी जाएगी। फांसी के लिए पवन जल्लाद 20 जनवरी को दिल्ली पहुंच जाएंगे। वहीं जेल प्रशासन भी फांसी की तैयारियों में जुटा हुआ है। हाल ही के दिनों में जेल में फांसी का ट्रायल भी हुआ और दोषियों के गले का नाप भी लिया गया।

निर्भया के आरोपियों ने अब तक फांसी से बचने के लिए जितने भी हथकंडे आजमाए उसमें वो कामयाब नहीं हुए। इससे पहले भी दोषियों ने याचिकाएं लगाई थीं जिसे कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया। बता दें, 16 दिसंबर 2012 की रात 6 लोगों ने मिलकर निर्भया के साथ हैवानियत की थी। जिसके बाद निर्भया की मौत हो गई थी। मामले के 6 आरोपियों पर हत्या का मामला दर्ज हुआ था जिसमें से एक नाबालिग होने के कारण जेल से बाहर आ गया था तो वहीं दूसरे आरोपी ने जेल में ही आत्महत्या कर ली थी। बाकी बचे 4 आरोपियों पर 2013 में एक ट्रायल कोर्ट ने हत्या की सजा सुनाई थी। जिसे दिल्ली हाईकोर्ट ने बरकरार रखा और सुप्रीम कोर्ट ने भी आरोपियों की सजा में बदलाव नहीं किया।

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