सिद्धू ने नहीं संभाला मंत्रालय का जिम्मा, पंजाब में पनपा राजनैतिक संकट    

पंजाब में बिजली भी गुल है और मंत्री भी। सूबे में लोगों का हाल बेहाल है और मंत्री जी भूमिगत हैं। उनका कोई अता-पता ही नहीं है। पूरे एक महीना हो चुका है, लेकिन अभी तक जनाब ने अपने दफ्तर में दस्तक तक नहीं दी है। दफ्तर की मरम्मत करने वाला तो इनके नाम की तख्ती भी लगा गया, लेकिन मंत्री साहब को इसकी सूध तक नहीं है। वहीं, सिद्धू साहब की इस करामात से सूबे में विपक्षी दलों को घर बैठे ही एक ऐसा मुद्दा मिल गया है, जिससे वे अमरिंदर सिंह की सरकार पर हमलावर बने हुए हैं। ये भी पढ़े :बड़ी खबर: सिद्धू को मंत्रिमंडल से बाहर करने की तैयारी, कैप्टन से पंगा लेकर फंस गए  

विपक्षी दलों के नेता कह रहे हैं कि राज्य में अब संवैधानिक संकट आ चुका है। मुख्यमंत्री को तो पूरा-पूरा अधिकार होता है कि वे किसी भी मंत्री को कोई सा भी पद दे, लकिन सिद्धू साहब ने तमाम पराकाष्ठा को पार करते हुए अमरिंदर सिंह के फरमान को मानना मुनासिब न समझा, जिसे लेकर सूबे में संवैधानिक संकट की स्थिति पैदा हो चुकी है। बात तो अब यहां तक पहुंच चुकी है कि सूबे में बीजेपी के महासचिव तरूण चुघ ने राज्य के राज्यपाल को इस मामले से संबंधित पत्र लिखकर इस मामले की ओर उनका ध्यान खींचा है। उन्होंने राज्यपाल से इस बात की मांग की है कि जल्द से जल्द इस मामले के लिए समाधान के रास्ते निकाले जाए, ताकि इस वर्तमान स्थिति से जल्द से जल्द समाधान पाया जा सके।

उन्होंने राज्यपाल से कहा कि इस समय राज्य मे संविधान खतरे में है। शपथ लिए एक महीना हो चुका है कि लेकिन अभी तक मंत्री साहब ने दफ्तर जाना मुनासिब नहीं समझ रहे हैं। वे सैलरी उठा रहे हैं। सरकार की तमाम सुख सुविधाएं उठा रहे हैं, लेकिन सूबे की जनता के प्रति उनका कोई ध्यान नहीं है। ऐसी परिस्थिति में उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री को अधिकार होता है तो वे किसी-भी मंत्री को कोई सा भी विभाग दे सकता है। आप उससे बहस नहीं कर सकते हैं, लेकिन अफसोस यहां पर तकरीबन एक महीने तक स्थिति काफी विचित्र बनी हुई है। उनके खिलाफ तो कार्रवाई होनी चाहिए। ये भी पढ़े :नवजोत सिंह सिद्धू को लगी तीखी मिर्ची ;अमित शाह से मिले कैप्टन अमरिंदर..हुई ये बातें

यहां से शुरू हुई थी ये रार
हालांकि, पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और सिद्धू के बीच रार की ख़बरे तो अमूमन आती ही रही है, लेकिन स्थिति तब संजीदा हुई जब आम चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था। पूरे देश में तो छोड़िए, पंजाब में भी जहां पर कांग्रेस का गढ़ मजबूत माना जाता था। वहां भी उन्हें इस आम चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा था, जिसे ध्यान में रखते हुए अमरिंदर ने सिद्धू को इस हार को लेकर जिम्मेदार ठहराया था। अमरिंदर ने कहा था कि हमारी इस हार का कारण कोई और नहीं सिद्धू ही हैं। आज हमें उन्हीं के कारण हार का सामना इस चुनाव में करना पड़ा है।

इसके बाद मुख्यमंत्री ने सिद्धू से स्थानीय निकाय का विभाग लेते हुए उन्हें उर्जा विभाग दे दिया, जिसे लेकर सिद्धू लगातार अपनी नाराजगी जता रहे हैं और अब स्थिति ऐसी आ चुकी है कि एक महीना हो चुका है, लेकिन अभी तक उन्होंने अपने विभाग की जिम्मेदारी नहीं संभाली है। ऐसे में राज्य में संवैधानिक संकट का दौर जारी है। विपक्षियों को घर बैठे ही एक मुद्दा देने का काम सिद्धू ने बखूबी किया है। अब तो फिलहाल ये आने वाला वक्त ही बताएगी कि आखिर चौतरफा दबाव झेलने के बाद भी क्या सिद्धू अपने वर्तमान विभाग को संभालंगे की नहीं, अगर नहीं तो फिर आगामी दिनों में पंजाब सरकार का क्या कदम रहता है ये तो फिलहाल आने वाला वक्त ही बता पाएगा। ये भी पढ़े :सिद्धू ने अब कांग्रेस पार्टी को ही घेरे में ले लिया कहा ;सबके सब जिम्मेदार हैं

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