दिखने लगा राजनाथ सिंह के रूस दौरे का असर, बहुत जल्द मिलेंगे भारत को यह घातक हथियार, खौफ में आया चीन  

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पूर्वी लद्दाख में सीमा पर अतिक्रमण को लेकर भारत और चीन (india china tension) के बीच सीमा विवाद अपने चरम पर पहुंच चुका है। स्थिति की संवेदनशीलता को भांपते हुए और ड्रैगन के हालिया रूख को मद्देनजर रखते हुए भारत को अब चीन की वार्ता पेशकश पर भरोसा नहीं हो रहा है। इस बीच चीन की घेराबंदी करने के लिए भारत तैयार हो चुका है। इस दौरान अब राजनाथ सिंह (Rajnath singh) के रूस (Russia) दौरे का असर भी सामने आ रहा है। बीते दिनों राजनाथ सिंह के रूस दौरे पर जाने से चीन भी खफा हो गया था और उसने रूस को साफ लहजे में कह दिया था कि यदि वह दोनों ही देशों के बीच रिश्तों में नरमी चाहता है तो उसे किसी भी प्रकार के हथियार भारत को देने से परहेज करने चाहिए, लेकिन रूस के हालिया को रूख को देखते हुए लगता है चीनी की किसी भी बात का असर रूस पर नहीं पड़ा है।

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भारत को मिला रूस का साथ 
मिली जानकारी मुताबिक भारत और रूस के बीच रक्षा सौदे में AK-203 असॉल्ट राइफल और का-226टी लाइट यूटिलिटी हेलिकॉप्टर को लेकर बात हुई है। स्थिति की संवेदनशीलता को भांपते हुए भारत ने रूस से कहा है कि अब इन रक्षा सौदे में देरी नहीं होनी चाहिए। वहीं रूस ने भी भारत को भरोसा दिलाते हुए कहा कि वह जल्द ही इसे अंजाम तक पहुंचा देगा। बता दें कि ऐसे वक्त में जब भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद को लेकर तनाव अपने चरम पर पहुंच चुका है। भारत और चीन दोनों ही देश सीमा पर हथियारों की तैनाती कर रहे हैं, तो ऐसी स्थिति में गत दिनों रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह चार दिवसीय परेड कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए रूस दौरे पर गए थे। वहां पर उनकी उप प्रधानमंत्री  युर्य बोरिसव से बात हुई थी और रूस ने भारत को हथियारों की आपूर्ति करने का भरोसा दिलाया था, जिस पर चीन ने एतराज भी जताया था। मगर अब रूस ने चीन के एतराज को दरकिनार करते हुए भारत को हथियार देने का भरोसा दिलाया है।

वहीं मिसाइल समझौते को लेकर रूस के रक्षा अधिकारियों का कहना है कि इसकी सप्लाई 2021 के आखिरी तक शुरू हो जाएगी।  एक अन्य राजनयिक सूत्र ने इस संदर्भ में कहा कि एके-203 राइफल के सौदे में कुछ प्रगति हुई। ये सौदे साढे सात लाख राइफल्स को लेकर हुए हैं। बताया जा रहा है कि इनमे से एक लाख आयतित होंगे और 6.71 लाख राइफल एक जॉइंट वेंचर के तौर पर उत्तर प्रदेश के कोरवा में इंडो-रूस राइफल प्राइवेट लिमिटेड बनाएगा।

फ्रांस का भी मिला साथ 
रूस के बाद अब फ्रांस ने भी भारत का साथ दिया है। ऐसी स्थिति में जब भारत और चीन के बीच विवाद अपने चरम पर है तो फ्रांस ने भारत से कहा कि बहुत जल्द ही राफेल की पहले खेफ के साथ आठ अतरिक्त राफेल भी भेजने की तैयारी हो रही है। फ्रांस ने उम्मीद जताते हुए कहा कि जल्द सभी विमान अंबाला एयरबेस पर भेज दिए जाएंगे। वहीं रूस और फ्रांस के बाद अब भारत को अमेरिका का साथ मिला है। अमेरिका लगातार भारत को सेटेलाइट इमेज भेज रहा है। साथ ही अमेरिका ने भारत से उन हथियारों और गोला बारूद की सूची मांगी है, जिसकी उसे वर्तमान में दरकार है।

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