रूस में चीन का बड़ा अपमान! राजनाथ सिंह जितनी नहीं मिली चीनी रक्षा मंत्री को तवज्जो

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लद्दाख सीमा विवाद को लेकर भारत-चीन के बीच तनाव का माहौल पिछले तीन महीने से निरंतर जारी है। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुलह कराने की कवायद जोर पकड़ने लगी है। इस बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रूस में चीनी रक्षा मंत्री वेई फेंगहे से मुलाकात की साथ ही सीमा विवाद के मुद्दे पर भारत की स्थिति स्पष्ट करते हुए चीन को कड़ा संदेश दिया। दरअसल राजनाथ सिंह और चीन के रक्षा मंत्री जनरल वेइ फेंगहे एक साथ रूस के सैन्य स्मारक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे थे। इस दौरान सैन्य स्मारक पर फूल चढ़ाने पहुंचे, राजनाथ सिंह का जोरदार स्वागत किया गया। दोनों तरफ से रूस के सैन्य अधिकारी राजनाथ सिंह को घेरे हुए थे। जिस तरीके से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का स्वागत किया गया, इससे एक बात तो स्पष्ट हो गई है, कि रूस ने चीन के मुकाबले भारत की दोस्ती को ज्यादा अहमियत दी है. वहीं रूस में हर जगह चीनी रक्षा मंत्री वेई फेंगही भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पीछे-पीछे चलते दिखाई दिए।

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रूस में राजनाथ सिंह का जब भी चीनी रक्षा मंत्री से सामना हुआ, पल्ला भारत का ही भारी रहा. इसका एक सबूत एससीओ की बैठक से पहले एक कार्यक्रम है. दरअसल मीटिंग से कुछ समय पहले राजनाथ सिंह और एससीओ के बाकी

सभी रक्षा मंत्री रूसी सेना के सबसे बड़े गिरजाघर में गए थे. इस दौरान यहां पर भी चीन के रक्षा मंत्री को पीछे रखा गया।

बहरहाल रक्षामंत्री सिंह ने ‘SCO’ की बैठक में चीन को सख्त चेतावनी देते हुए कहा, ‘सीमा पर विवाद के लिए चीन पूरी तरह से जिम्मेदार है. देश की अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए हमारी सेना प्रतिबद्ध है।

उन्होंने आगे कहा कि चीनी सेना का रवैया दोनों देशों के समझौते के खिलाफ है. बीजिंग सीमा पर बड़ी संख्या में सेना जुटा रहा है और यथास्थिति को बदलने की एकतरफा कोशिश कर रहा है. अगर चीनी सीमा की तरफ से जरा भी कायराना हरकत की गई तो, भारत हर चुनौती से निपटने के लिए तैयार है।

सूत्रों के अनुसार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है, चूंकि जिस तरीके से रूस ने भारत की बढ़ोतरी की है उससे चीन को सबक मिलना तय है। एक तरह से यूं कहा जा सकता है कि रूस ने चीन को बुरी तरह से बेइज्जती कर वापस भेजा है।

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