Wednesday, December 8, 2021

किसान आंदोलन के लिए राकेश टिकैत के आंसू बन गये संजीवनी, ऐसा है सच

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दिल्ली। दिल्ली के बार्डर पर किसानों को बहुत ही उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कई बार ऐसा हुआ कि अराजकतत्वों ने किसान आंदोलन को गुमराह करने की कोशिश की। अंिहंसक किसान आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश की गयी। 26 जनवरी को लाल किले पर हुई ट्रैक्टर परेड और हिंसा के बाद किसान आंदोलन लगभग खत्म होने की कगार पर था लेकिन 29 जनवर को राकेश टिकैत के ‘आंसू‘ रंग लाये। राकेश टिकैत की मार्मिक अपील ने आंदोलन को फिर खड़ा कर दिया। टिकैत के आंसुओं ने न सिर्फ आंदोलन को खत्म होने से बचाया बल्कि उन्हें भी किसान आंदोलन का बड़ा चेहरा बना दिया। किसानों के सबसे बड़े चहेते बन गये।

26 जनवरी को ऐसा था दृश्य

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गत वर्ष नवंबर में शुरू हुए किसान आंदोलन को 4 महीने ही पूरे हुए थे। 26 जनवरी के दिन किसानों ने ट्रैक्टर परेड निकाली थी। इस दौरान हिंसा हुई जिसका पूरी जवाबदेही किसानों पर तय कर दी गयी। लाल किले पर भी जमकर उपद्रव हुआ। लाल किले पर उपद्रव से किसान विचलित हो गये। इस हिंसा के बाद किसान आंदोलन कमजोर पड़ता दिखाई दिया। किसान नेता 1 फरवरी को संसद मार्च निकालने वाले थे लेकिन इस हिंसा के कारण इसे भी रद कर दिया। किसान आंदोलन कमजोर होने लगा।

टिकैत ने आंदोलन खत्म करने के संकेत दिया

लाल किले पर हुई हिंसा ने किसान आंदोलन को बैकफुट पर ला दिया। किसान अब आंदोलन की धार को कमजोर होता नहीं देखना चाहते थे। 28 जनवरी को दिल्ली पुलिस की ओर से राकेश टिकैत को नोटिस दिया गया। उन्हें ट्रैक्टर परेड के दौरान तय शर्तों को तोड़ने और किसानों को उकसाने के मामले में नोटिस जारी किया गया था। नोटिस मिलने के कुछ देर बाद राकेश टिकैत सामने आए और उन्होंने संकेत दिए कि आज रात को ही आंदोलन खत्म होगा। इससे किसानो में हलचल मच गयी। राकेश टिकैत के भाई नरेश टिकैत ने भी अपने गांव में गाजीपुर में धरना खत्म करने का ऐलान कर दिया।

गाजीपुर बॉर्डर बन गई छावी

28 जनवरी की शाम होते-होते यूपी सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को प्रदर्शनस्थल खाली कराने का आदेश दे दिया। नोएडा, गाजियाबाद के अधिकारी सुरक्षाबलों के साथ गाजीपुर बॉर्डर पर पहुंच गये। राकेश टिकैत को समझाया और बात की। वहां बने टैंट, शौचालय को हटाना शुर किया। थोड़ी ही देर में गाजीपुर बॉर्डर छावनी में तब्दील हो गई। किसान नेता बैकफूट पर आ गये।

फिर बहे टिकैत के आंसू और उमड़ पड़ी भीड़

किसान आंदोलन बदली परिस्थितियों में कमजोर दिखने लगा। ऐसा माने जाने लगा था कि किसान आंदोलन अब लगभग खत्म हो गया है। उसी शाम थोड़ी देर बाद राकेश टिकैत मीडिया के सामने आये। उन्होंने अपना दर्द बताते हुए आंसुओं को रोक नहीं पाये। उन्होंने सिसकते हुए कहा कि किसानों के साथ धोखा किया जा रहा है। राकेश टिकैत ने ऐलान किया कि ‘देश का किसान सीने पर गोली खाएगा, पर पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने धमकी देते हुए कहा कि तीनों कृषि कानून अगर वापस नहीं लिए गए तो वो आत्महत्या करेंगे लेकिन धरना स्थल खाली नहीं करेंगे। उस दिन बहे टिकैत के आंसू किसान आंदोलन के लिए ‘संजीवनी‘ साबित हुए और आंदोलन फिर खड़ा हुआ।

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