नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गुजरात के सोमनाथ में कई परियोजनाओं की आधारशिला रखी। परियोजनाओं में सोमनाथ सैरगाह, सोमनाथ प्रदर्शनी केंद्र, पार्वती मंदिर और पुराने (जूना) सोमनाथ के पुनर्निर्मित मंदिर परिसर शामिल हैं। इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें धार्मिक पर्यटन को मजबूत करने की जरूरत है। इससे युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। युवाओं को हमारे अतीत का भी ज्ञान होगा। आस्था को आतंक से कुचला नहीं जा सकता, हमें अतीत से सीखना चाहिए। जब मैं ‘भारत जोड़ो आंदोलन’ (एकजुट भारत आंदोलन) की बात करता हूं, तो यह केवल भौगोलिक और वैचारिक सम्बन्ध के बारे में नहीं है, बल्कि हमारे इतिहास की विरासत के साथ एक नया भारत बनाने की शपथ।

वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिलान्यास व लोकार्पण समारोह को आनलाइन सम्बोधित करते हुए कहा कि आतंक का अस्तित्व अधिक समय तक नहीं रह सकता, कुछ समय तक ताकत के बल पर सत्ता हथिया सकता है लेकिन उसका टिके रहना मुश्किल होता है। प्रधानमंत्री ने नाम लिए बिना अफगानिस्तान में बंदूक की नोंक पर सत्ता हथियाने वाले तालिबान की ओर की ओर स्पष्ट इशारा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आतंक से आस्था को नहीं कुचला जा सकता, सोमनाथ मंदिर इसका जीता जागता उदाहरण है।

सोमनाथ मंदिर के समारोह में दिल्ली से आनलाइन जुड़ रहा हूं, लेकिन मन से वहीं पर महसूस करता हूं। सरदार पटेल ने आजादी के बाद सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार अपने दृढ़ संकल्प से किया मैं उनको नमन करता हूं। समारोह में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह, भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, जहां वर्चुअल शामिल हुए वहीं मुख्यमंत्री विजय रुपाणी उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल तथा गुजरात के पर्यटन मंत्री जवाहर चावड़ा सोमनाथ में मौजूद रहे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पर्यटन से जब आधुनिकता जुड़ती है तो कैसे परिवर्तन आते हैं यह गुजरात में देखा है। कच्छ से लेकर द्वारका सोमनाथ तीर्थ स्थलों का विकास आसपास के क्षेत्रों में भी बदलाव लाया। देश व दुनिया के श्रद्धालु व पर्यटक यहां आते हैं यहां आने वाले श्रद्धालुओं को जूना सोमनाथ मंदिर के भी दर्शन के लाभ होंगे। पार्वती माता का मंदिर निर्माण एक अभूतपूर्व घटना है। समुद्र के किनारे खड़े हमारे मंदिर पर्यटन व आस्था के बड़े केंद्र हैं, जिससे वहां के आसपास के इलाकों का भी विकास होता है।

सोमनाथ सदियों से भगवान शिव की भूमि रही है, शास्त्रों में कहा गया है जो सिद्धि वह कल्याण को प्राप्त करें, वही शिव हैं। संहार में भी सृजन को जन्म देने वाले भगवान सोमनाथ हैं, शिव अनादि योगी हैं। भगवान शिव का मंदिर हमें प्राचीनता वह हमारे अस्तित्व का बोध कराता है। दुनिया का कोई भी व्यक्ति जब इस स्थापत्य की अद्भुत कला को देखता है तो उसे केवल एक मंदिर नजर नहीं आता बल्कि एक हजारों सालों की सभ्यता और संस्कृति नजर आती है जो सबको प्रेरणा देती है। हमारे ऋषि-मुनियों ने प्रभास याने प्रकाश, ज्ञान का क्षेत्र के रूप में विकसित किया।

आस्था को आतंक से नहीं कुचला जा सकता इस मंदिर को कई बार तोड़ा गया नष्ट किया गया प्रतिमाओं को खंडित किया गया अस्तित्व को मिटाने का हर संभव प्रयास किया गया। जितने भी बार इसे गिराया गया यह उतने ही बार खड़ा हुआ। सोमनाथ मंदिर आज भारत ही नहीं पूरे विश्व के लिए एक विश्वास है एक आश्वासन भी है। जो तोड़ने वाली शक्तियां हैं जो आतंक के बूते शक्ति का प्रदर्शन करती है कुछ समय के लिए भी हावी हो सकती हैं लेकिन उनका अस्तित्व कभी स्थाई नहीं हो सकता। वह ज्यादा दिनों तक मानवता को दबाकर नहीं रख सकती हैं। यह बात जितनी तब सही थी जब कुछ आतताई सोमनाथ को गिरा रहे थे उतनी ही सार्थक आज भी है। सोमनाथ मंदिर के भव्य विकास व निर्माण की यात्रा कुछ सालों का नहीं बल्कि सदियों की दृढ़ इच्छा शक्ति तथा वैचारिक भावना का प्रमाण है। राष्ट्रपति डा राजेंद्र प्रसाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल कन्हैयालाल मुंशी के संकल्प का परिणाम है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज राम मंदिर के रूप में भारत के गौरव का प्रतिबिंब खड़ा हुआ है। इतिहास से सीखकर, वर्तमान को सुधारने की एक नया भविष्य बनाने की कहानी है। यह केवल भौगोलिक एवं वैचारिक निर्माण नहीं है यह हमारे अतीत से जोड़ने का प्रकल्प है। हमने अतीत के खंडहरों पर आधुनिक गौरव का निर्माण किया है। अतीत के संस्करणों को संजोया है। डा राजेंद्र प्रसाद जी ने कहा था सदियों पहले भारत सोना चांदी का भंडार हुआ करता था दुनिया के सोने का बड़ा हिस्सा भारत के मंदिरों में विद्यमान था।

सोमनाथ मंदिर को कब तोड़ा गया जब एक भव्य मंदिर के साथ समृद्ध भवन में भी तैयार खड़ा था। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्वती मंदिर की आधारशिला भी रखी। इसका निर्माण कुल 30 करोड़ रुपये के परिव्यय से किया जाना प्रस्तावित है। इसमें सोमपुरा सलात शैली में मंदिर निर्माण, गर्भ गृह और नृत्य मंडप का विकास शामिल है।

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