नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आज एक अहम बिल को मंजूरी दी। संसद में पास हुए ओबीसी संशोधन बिल को हरी झंडी दे दी है, अब यह बिल कानून बन गया है, अब राज्य ओबीसी जातियों की लिस्ट तैयार कर सकेंगे। दरअसल, उच्चतम न्यायालय ने बीते मई में आरक्षण पर पुनर्विचार से जुड़ी एक याचिका की सुनवाई करने की मांग खारिज करते हुए कहा था कि 102वें संविधान संशोधन के बाद ओबीसी की लिस्ट बनाने का अधिकार राज्यों के पास नहीं, बल्कि केंद्र के पास है। इसके बाद केंद्र सरकार ने ओबीसी लिस्ट तय करने का अधिकार राज्यों को देने के लिए 127वां संविधान संशोधन विधेयक लाने की पहल की।

गौरतलब है कि बीते 11 अगस्त को संसद में ओबीसी संशोधन बिल पास किया गया था। लोकसभा में 10 अगस्त को ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) से सम्बन्धित 127वां संविधान संशोधन बिल दो तिहाई बहुमत से पारित हुआ था। मोदी सरकार के इस बिल का कांग्रेस, सपा, बीएसपी सहित पूरे विपक्ष ने समर्थन किया था। बिल को लेकर हुए मत विभाजन के दौरान इसके पक्ष में कुल 385 सदस्यों ने वोट दिया था, जबकि खिलाफ में एक भी वोट नहीं पड़ा था।

ओबीसी संशोधन बिल बना कानून

लोकसभा में केंद्र सरकार ने बीते 9 अगस्त को ओबीसी संशोधन बिल, 2021 पेश किया था, अन्य पिछड़ा वर्ग की लिस्ट तैयार करने का अधिकार राज्यों को देने से जुड़े इस बिल को विपक्ष का भी समर्थन मिला था। राष्ट्रपति की अनुमति मिलने के बाद ओबीसी संशोधन बिल कानून बन गया है। अब राज्यों और केंद्र शासित प्रदशों को अन्य पिछड़ा वर्ग की लिस्ट तैयार करने का अधिकार मिलेगा, अभी तक यह अधिकार केंद्र के पास है।

संसद में बीते मानसून सत्र के दौरान शोर शराबे के बीच यह अहम अहम बिल लोकसभा और राज्यसभा दोनों ही सदनों से बड़ी शांति के साथ पास हो गया था। आखिर यह बिल है क्या और सभी दल इस बिल पर एकमत कैसे हो गए। संसद में ऐसा बहुत कम होता है कि विपक्ष को जो कानून पसंद न हो, उसे भी वह पूर्ण और बिना शर्त समर्थन दे, इसलिए यह जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर इस बिल के पक्ष में खड़ा होने की राजनीतिक दलों की क्या मजबूरी है? 2022 में उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में विधानसभा के चुनाव हैं।

चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाता निर्णायक भूमिका में होते हैं, वे वर्षों से और आरक्षण की मांग कर रहे थे। राज्य सरकारें अपने हिसाब से ओबीसी की सूची तैयार करने की अनुमति मांग रही थीं। ओबीसी रिजर्वेशन की मांग पर कई बार बड़े-बड़े आंदोलन हो चुके हैं। रेलमार्ग को जाटों ने जाम किया, लेकिन उन्हें आरक्षण नहीं मिला। महाराष्ट्र सरकार ने मराठा आरक्षण को बढ़ाया, तो सुप्रीम कोर्ट ने उसे खारिज करते हुए कहा कि ओबीसी लिस्ट में किसी जाति को शामिल करना केंद्र का अधिकार है, राज्य सरकारें ऐसा नहीं कर सकतीं। इसी सबको देखते हुए ओबीसी संशोधन बिल संसद में पास किया गया।

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