सियासी गलियारों में मचा हड़कंप…देर रात को हुई नीतीश-प्रणब की सीक्रेट मीटिंग..बन गई बात!

बिहार में चमकी बुखार का खतरा बढ़ता जा रहा है। जिससे अस्पतालों में बच्चों की हालत बद से बदत्तर हो रही है। चमकी बुखार के वजह से अब तक राज्य में 96 बच्चों की मौत हो गई है। तो वही राज्य सरकार भी इस मामले में अब तक सुस्त तरीके से काम कर रही है। लेकिन बच्चों की इस मौत पर भी बिहार में जमकर राजनीति हो रही है। एक तरफ विपक्ष मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ठिकाना पूछ रहे है। तो वही सीएम नीतीश कुमार भी दिल्ली की सियासत में व्यस्त नजर आ रहे है। एक तरफ जहां नीतीश के राज्य में बच्चें बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था के कारण अपनी जान से हाथ धो रहे है। तो वही नीतीश कुमार शनिवार को नीति आयोग के बैठक लेने दिल्ली पहुचें। इसके अलावा यहां नीतीश कुमार ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से भी मुलाकात की। जिससे बिहार की सियायसी गलियारों में और ज्यादा उछाल आ गया।

नीतीश कुमार ने शनिवार को सिर्फ नीति आयोग की बैठक में ही हिस्सा नही लिया। बल्कि इसके बाद वह अपने आने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी भी करते हुए नजर आए। बैठक के बाद नीतीश कुमार ने पार्टी की बैठक में भी हिस्सा लिया। जिसमे नीतीश कुमार ने फैसला लिया कि वह झारखंड के विधानसभा चुनाव में अकेले लड़ेंगे। न की बीजेपी के साथ मिलकर। लेकिन इन सब राजनीतिक तैयारियों के बीच अभी तक नीतीश कुमार का कोई भी बयान राज्य की लाचार स्वास्थ्य व्यवस्था पर नहीं आया है। सीएम नीतीश कुमार बच्चों की मौत के मुद्दे से न सिर्फ बचने की कोशिश कर रहे है। बल्कि वह इस जिम्मेदारी से भाग भी रहे है। हैरानी की बात ये है कि बिहार सरकार ने बच्चों की मौत को उनकी नियति बताया है। बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय इसके लिए नियति को जिम्मेदार बता चुके हैं। उन्होंने एक निजी चैनल से बात करते हुए कहा था कि ‘बच्चों की मौत के लिए न प्रशासन जिम्मेदार है और न ही सरकार। बच्चों की नियति ठीक नहीं थी। मौसम भी इसके लिए जिम्मेदार है।’

गौरतलब है कि बिहार में दिमागी बुखार के चलते अब तक 96 बच्चों की मौत हो चुकी है। इतना ही नहीं, रविवार को मुजफ्फरपुर के एसके मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन के सामने ही तीन मासूम बच्चों की ही मौत हो गई। वही प्रचंड गर्मी की वजह से 44 लोगों ने अब तक जान जा चुकी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिमागी बुखार से मरने वाले बच्चों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये मुआवजे का एलान किया है। अधिकारियों ने बताया कि मुजफ्फरपुर समेत राज्य के 12 जिलों में इस बीमारी का कहर लगातार बढ़ रहा है। मृतकों में ज्यादातर की उम्र 10 वर्ष से कम है। बच्चों के हाइपोग्लाइसीमिया (शुगर लेवल के बिल्कुल कम होने) और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन के शिकार होने के कारण मौत हो रही है। ये भी पढ़ें:-ममता बनर्जी से बढ़ रही है नीतीश की करीबी ? प्रवक्ता ने दिया इस्तीफा..मचा बवाल

चमकी बुखार पर बिहार का हाल

सौजन्य:- जी न्यूज

 

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