पश्चिम बंगाल चुनाव में बीजेपी को फायदा पहुंचाएगा ओवैसी का यह कदम

Owaisi's move will benefit BJP in West Bengal elections

पश्चिम बंगाल में होने वाले चुनाव पर सबकी नज़रे लगी हुई है, इसमें भाजपा और तृणमूल कांग्रेस शामिल है। बेहतर करने की होड़ के साथ-साथ दोनों ही पार्टी एक दूसरे को हराने की पूरी कोशिश में लगी हैं। दो बार ममता बनर्जी यहां पर जीत का ताज पहना था, तो इस बार भी जीतना उनके लिए शान की बात होगी। ममता की पश्चिम बंगाल में धाक जमाए हुए है, तो बीजेपी भी वहां अपनी राह बनाने की कोशिश में जुटी हुई है। भाजपा के पास पश्चिम बंगाल में खोने के लिए कुछ नहीं है, वो केवल ममता सरकार को वहां से हटाना चाह रही है। इस कंडीशन में  पश्चिम बंगाल में चार बड़ी पार्टियां दिखाई दे रही है, जिनमें टीएमसी, भाजपा, वाम दल और कांग्रेस शामिल है, इनके बावजूद मुकाबला केवल भाजपा और टीएमसी में ही है, लेकिन सुत्रों के हवाले से पता लगा है कि एक और पार्टी इसमें एंट्री लेने वाली है और वो पार्टी है असदुद्दीन औवेसी की एआईएमआईएम।

इसे भी पढ़ें-क्या सस्ता हो जाएगा पेट्रोल-डीजल? अब RBI गवर्नर ने दी टैक्स घटाने की सलाह

पश्चिम बंगाल में दर्ज करेंगे मौजूदगी

बिहार से प्राप्त सीटों के आधार पर अब औवेसी पश्चिम बंगाल में अपनी उपस्थिति दर्ज करना चाहते हैं। इस तरह देखा जाए तो आगामी चुनाव में यहां मुस्लिम वोटों का बंटवारा हो सकता है। राजनीतिक विश्‍लेषक प्रदीप सिंह और शिवाजी सरकार का ऐसा कहना है कि बिहार से लगती सीमा के निकट जो विधानसभा क्षेत्र हैं, वहां पर औवेसी का बोलबाला हो सकता है। फुरफुरा और इसके आसपास के क्षेत्रों में मुस्लिम लोगों को लगता है कि औवेसी उनके नेता हैं। खोने के लिए भी उनके पास कुछ नहीं है। इस मामले में प्रदीप सिंह का कहना है कि पहले पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्‍या में इनके वोटों पर टीएमसी का कब्‍जा हुआ करता था, लेकिन इस बार इसमें सेंध लगाने में औवेसी सफल हो सकते हैं।

किसको होगा ओवैसी से फायदा?

ओवैसी का इस चुनाव में आना सीधे सीधे भाजपा को फायदा पहुंचाएगा। इसकी वजह ये मानी जा रही है कि भाजपा को राज्‍य में पहले भी मुस्लिम वोट कम या न के ही बराबर मिलते थे और अब भी भाजपा मुस्लिम्स से सपोर्ट ना मिल पाता, लेकिन अब चुनाव में औवेसी के आने के बाद वोटों का बंटवारा जिस तरह से देखने को मिलेगा उसमें ममता सरकार को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। टीएमसी के वोट औवेसी को कारण कटेंगे, जिसका सीधा फायदा भाजपा को हो जाएगा। प्रदीप सिंह की सलाह से ही भाजपा ने यहां पर राज्‍य सरकार की तुष्‍टीकरण की नीति के खिलाफ आवाज बुलंद की है, इसलिए पार्टी की निगाह हिंदू वोट बैंक पर है। देखा जाए तो औवेसी भाजपा के लिए मायने नहीं रखते हैं। वो केवल मुस्लिम बहुल इलाके तक सीमित हैं।

इसे भी पढ़ें-भ्रष्टाचार, चुनावी हिंसा से निकलने की कोशिश कर सकते हैं बंगाल के मतदाता

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *