Homeदेशमिशन चंद्रयान-2 की कमान इन दो महिलाओं के हाथ, निभाएंगी अहम जिम्मेदारी

मिशन चंद्रयान-2 की कमान इन दो महिलाओं के हाथ, निभाएंगी अहम जिम्मेदारी

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यूं तो हर क्षेत्र में महिलाएं अपना परचम फहरा रही हैं। और अपनी सफलता की हर दिन एक नई कहानी लिख रही हैं। अपनी सफलताओं से देश और परिवार का सिर गर्व से ऊंचा उठाने वाली लड़कियां दुनिया के उस मिशन में भी शामिल हैं। जिस मिशन भारत द्वारा सफल कराने की कोशिशें की जा रही हैं। इस मिशन की जिम्मेदारी दो महिला वैज्ञानिकों के कंधों पर डाली गई है। ऐसा पहली बार है जब किसी मिशन की कमान महिलाओं को दी गई है। इन दो महिलाओं के बारे में बताने से पहले हम आपको बताएंगे चंद्रयान मिशन-2 के बारे में। जो अगर सफल हो जाता है तो ये पहला मिशन बन जाएगा जो चांद की दक्षिणी सतह पर उतरेगा। ये हिस्सा एक ऐसा हिस्सा है जिस जगह पर उतरने का साहस सिर्फ भारत ने दिखाया है। भारत का ये मिशन तीसरा है। इससे पहले 2008 में चंद्रयान-1 और 2013 में मार्स ऑर्बिटर मिशन को अंजाम दिया गया था। चंद्रयान-2 मिशन के अंतर्गत चंद्रमा की कक्षा तक सबसे शक्तिशाली रॉकेट को भेजा जाएगा जो भारत में ही बनाया गया है।pragyan_vikram अब जानते हैं इन दो महिला वैज्ञानिकों के बारे में। जो इस मिशन को पूरा करने के लिए खूब मेहनत कर रही हैं।

दो महिला वैज्ञानिकों के कंधे पर है मिशन की जिम्मेदारी
इस मिशन को अंजाम देने वाली निदेशक का नाम मुथैया वनिता है। इस महिला वैज्ञानिक के कंधों पर मिशन की शुरुआत से लेकर आखिर तक की जिम्मेदारी है। इनके साथ मिशन निदेशक रितु करिधाल श्रीवास्तव हैं। उनके ऊपर भी मिशन की बहुत बड़ी जिम्मेदारी डाली गई है। जैसे ही चांद की सतह पर उपग्रह को उतारा जाएगा उसके बाद इनका असल काम शुरू हो पाएगा। यानि एक महिला मिशन को पूरा कराएगी तो दूसरी महिला मिशन के बाद का पूरा काम देखेगी।

चंद्रयान-2 मिशन में महिलाओं के योगदान पर बंगलूरू में इसरो उपग्रह केंद्र के पूर्व निदेशक डॉ.एम अन्नादुराई बोले कि, इससे पहले भी महिलाओं ने विभिन्न उपग्रह प्रक्षेपणों में अपना अहम योगदान दिया है। पर ये पहली बार है जब इतने बड़े मिशन की निदेशक और परियोजना निदेशक दो महिलाएं हैं। वो बोले कि, महिलाओं को इस तरह मिशन में भाग लेते देखने में काफी अच्छा लगता है। महिलाओं का इस तरह का नेतृत्व आने वाले समय में भी हमेशा जारी रहेगा।

मुथैया वनिता
आपको बता दें, मिशन चंद्रयान-2 में अहम भूमिका निभाने वाली मुथैया वनिता सैटेलाइट सेंटर से एक इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम इंजीनियर हैं। वह डिजिटल सिग्नल प्रोसेसिंग में काफी तेज हैं और उन्होंने उपग्रह संचार पर भी कई शोध पेपर लिखे हैं। मुथैया को 2006 में एस्ट्रॉनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया ने सर्वश्रेष्ठ महिला वैज्ञानिक के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।

रितु करिधाल श्रीवास्तव
रितु करिधाल की अगर बात की जाए तो ये इनका पहला बड़ा मिशन नहीं है। रितु इससे पहले भारत के मार्स मिशन की डिप्टी ऑपरेशन डायरेक्टर भी रह चुकी हैं। रितु करिधाल को 2007 में इसरो का युवा वैज्ञानिक पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। रितु को बचपन से ही तारों से काफी प्यार था। वो हमेशा तारों के उस पार की दुनिया के बारे में सोचती थीं। यही कारण था कि, उनके लिए विज्ञान विषय नहीं बल्कि जुनून बना। ये भी पढ़ेंः- यूपी की बेटी बनी चन्द्रयान-2 की रॉकेट वूमेन..देशभर ने किया सलाम

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