जब गुजरात दंगों में फंसे थे मोदी, तब उस वक्त संकट मोचन बनकर उभरे थे अरूण जेटली

0
107
Loading...

यूपी। आज एम्स में आखिरी सांस के साथ अरूण जेटली ने दुनिया को अलविदा कह दिया। अरूण जेटली 66 वर्ष के थे। ऐसा बताया गया है कि जेटली को सांस की शिकायत थी। जिसके चलते काफी समय से एम्स में एडमिट थे। लेकिन अरूण जेटली को राजनीति के क्षेत्र में मोदी का चाणक्य माना जाता था। इतना ही नहीं इन्होंने मोदी को हर तरह की मुसीबत से निकालने वाले तारणहार कहलाते थे। इसे भी पढ़ें :अरूण जेटली के परिवार से पीएम मोदी ने की फोन पर बात, परिवार ने दौरे पर पीएम से कही ऐसी बात

बता दें कि जेटली मोदी के ही नहीं बल्कि अमित शाह के लिए भी मसीहा से कम नहीं थे। जिस वक्त अमित शाह को गुजरात से बाहर किया गया था तब कैलाश कालॉनी के दफ्तर में एक साथ देखा जाने लगा।

ऐसा कहा जाता है कि 2014 का चुनाव जीतने के बाद ली जाने वाली प्रधानमंत्री की औपचारिक घोषणा से पहले जेटली ने राजनाथ सिंह, शिवराज सिंह चौहान और नितिन गडकरी को साथ लाने के लिए काफी पापड़ बेले थे और पर्दे के पीछे अपना काम करते रहे। इसे भी पढ़ें :वित्त मंत्री अरुण जेटली के बाद विदेश मंत्रालय ने कही ये बड़ी बात

जेटली पेशे से शुरू से वकील थे। वह अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री ही थे उसके बाद मोदी के समय पर वित्त मंत्री बने। खबरों की मानें चो मोदी खुद अरूण जेटली को “अनमोल हीरा” भी कह चुके हैं।

दरअसल, पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता रहे अरुण जेटली के लिए राजनीतिक हलकों में अनौपचारिक तौर पर माना जाता था कि वह ‘पढ़े लिखे विद्वान मंत्री’ हैं। पिछले तीन दशक से अधिक समय तक अपनी तमाम तरह की काबिलियत के चलते जेटली लगभग हमेशा सत्ता तंत्र के पसंदीदा लोगों में रहे, सरकार चाहे जिसकी भी रही हो। साथ ही जेटली बहुत शांत और विनम्र और राजनीतिक तौर पर उत्कृष्ट रणनीतिकार थे। इसे भी पढ़ें :अमित शाह होंगे भारत के नए गृहमंत्री? सुषमा, जेटली और नड्डा को भी अहम जिम्मेदारियां

हमारा यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें
Loading...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here