मिशन चंद्रयान-2: इस कारण ISRO से टूटा लैंडर विक्रम का संपर्क, सामने आई बड़ी वजह

भारत का मिशन चंद्रयान-2 जिस पर सिर्फ भारत की नहीं बल्कि, पूरे विश्व की नजरें थीं। हर कोई भारत की इस कामयाबी को देखने के लिए खूब उत्सुक था। जिस दिन चंद्रयान-2 को लॉन्च किया गया उसी दिन से पूरे विश्व में भारत का डंका बज रहा था। क्योंकि, भारत चांद के उस हिस्से पर जा रहा था, जहां जाने की हिम्मत कोई और देश अब तक नहीं कर पाया। लेकिन, करोड़ों भारतीयों की उम्मीदें और इसरो वैज्ञानिकों का हौंसला उस समय टूट सा गया, जब लैंडर विक्रम चांद की सतह से सिर्फ 2.1 किलोमीटर की दूरी पर था, और उसका संपर्क धरती पर मौजूद केंद्र से टूट गया। इसरो मुख्यालय का जो माहौल खुशी से भरा हुआ था। अचानक से वहां मायूसी छा गई। इस दौरान खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मुख्यालय पर मौजदू थे। देश के कोने-कोने से छात्र इस कामयाबी के गवाह बनने वाले थे। लेकिन, सबकी उम्मीदों पर उस एक क्षण ने पानी फेर दिया।

हालांकि, जब लोगों को खबर मिली तो कहीं ना कहीं लोगों में एक उम्मीद की किरन फिर जागी। और सबने मिलकर इसरो का हौंसला बढ़ाते हुए कहा कि, हम कामयाब जरूर होंगे। पीएम मोदी ने भी वैज्ञानिकों का हौंसला बढ़ाया। उन्होंने कहा कि, हिम्मत रखें, हम कामयाब जरूर होंगे। तो वहीं इसरो वैज्ञानिक ने कहा कि, ‘पहले हमें लगा कि एक थ्रस्टर से कम थ्रस्ट मिलने की वजह से ऐसा हुआ, लेकिन कुछ प्राथमिक जांच से ऐसा लग रहा है कि एक थ्रस्टर ने उम्मीद से ज्यादा थ्रस्ट लगा दिया।’

यहां ये जानना सबसे ज्यादा जरूरी है कि, किसी भी अंतरिक्षयान के लिए थ्रस्टर कितना खास है
थ्रस्टर अंतरिक्षयान में लगने वाला एक छोटा रॉकेट इंजन होता है। इसका उपयोग यान के रास्तों को बदलने के लिए किया जाता है। साथ ही अंतरिक्षयान की ऊंचाई कम या ज्यादा की जाती है। फिलहाल तो अभी इसरो की तरफ से जारी हुए आधिकारिक बयान में ये कहा गया है कि, डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है। जबकि, एक इसरो वैज्ञानिक का कहना है कि, ‘लैंडर विक्रम के लेग्स को रफब्रेकिंग के समय हॉरिजोंटल में रहना था और फाइन ब्रेकिंग से पहले लैंडिंग सरफेस पर वर्टिकल लाना था। अब तक के शुरुआती विश्लेषण से पता चलता है कि, लैंडिग के समय थ्रस्ट जरूरत से ज्यादा हो गया होगा, जिससे विक्रम अपना रास्ता भटक गया, ये उसी तरह की कंडीशन है जैसी किसी तेज रफ्तार कार पर अचानक ब्रेक लगाया जाता है और उसका संतुलन बिगड़ जाता है।’

अब तक के सामने आए विश्लेषण पर इसरो वैज्ञानिकों का यही मानना है। बाकी, अब भी विश्लेषण जारी है। माना जा रहा है कि, असल कारण 3 दिन बाद ही पूरी तरह साफ हो पाएगा, जब चांद पर बाकी दो ऑर्बिट पहुंचेंगे। बता दें कि विक्रम लैंडर का संपर्क जिस जगह पर इसरो से टूटा था। उस जगह पर आर्बिटर को पहुंचने में पूरे तीन दिन लगेंगे। और इसके बाद विक्रम में ढूंढ़ने का काम करेगे। ये भी पढ़ेंः- चंद्रयान-2: चांद पर कहां और किस जगह है लैंडर विक्रम, 3 दिन में रहस्य होगा खत्म

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