MP: क्या खत्म हो गया शिव का राज?, सीएम पर सस्पेंस बरकार

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shivraj vs narendra tomar

कोरोना वायरस से पूरा देश जूझ रहा है तो वहीं मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार गिरने के बाद प्रदेश की जनता को एडमिनिस्ट्रेटर मिलने में देरी हो रही है. दरअसल राज्य में जब से कांग्रेस का क्लीन स्वीप हुआ है ऐसा लग रहा था कि मामा चौथी बार सत्ता पर काबिज होंगे लेकिन सियासी समीकरण के हिसाब से न तो बीजेपी सरकार बना पाई है और न ही विधायक दल का नेता चुन पाई है. ऐसे में दिक्कत प्रदेश की जनता को ही है।

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प्रदेश में मामा को अभी तक बीजेपी आलाकमान से कोई ऑर्डर नहीं मिले हैं कि वो सरकार बना सके लेकिन सबसे प्रबल दावेदार समझे जाने वाले शिवराज सिंह के नाम पर अभी तक पार्टी शीर्ष नेतृत्व का ग्रीन सिग्नल क्यों नहीं मिल पाया है इस पर सबको संशय है। वहीं ऐसा माना जा रहा है कि बीजेपी में मध्यप्रदेश के अगले मुख्यमंत्री के लिए सिर्फ शिवराज ही एकमात्र विकल्प नहीं है, पार्टी आलाकमान की फुसफुसाहट ने शिवराज सिंह चौहान को हैरत में डाल दिया है इसलिए कुछ निर्णय लेने में शीर्ष नेतृत्व देरी कर रहा है। जिन तीन नामों पर चर्चा जोरों पर है उनमें केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, नरोत्म मिश्रा, और मामा शिवराज भी शामिल हैं। अगर किसी कारण मुख्यमंत्री चेहरे पर सहमति नहीं हो पाती है तो आलाकमान उपचुनाव के दौरान सीएम का चेहरा घोषित करेगा जिसमें ऐसा माना जा रहा है कि तोमर के लिए उपचुनाव सबसे बड़ा फैक्टर साबित होगा।

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस से बगावत कर जो विधायक बीजेपी के पाले में आए हैं वो ज्यादातर ग्वालियर-चंबल रीजन से आते हैं. कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए सीनियर नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया भी इसी क्षेत्र से आते हैं. महत्वपूर्ण बात ये है कि खुद तोमर भी इसी क्षेत्र से आते हैं. ऐसे में उपचुनाव में तोमर की भूमिका काफी अहम रहेगी.

नरेंद्र सिंह तोमर के अलावा पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा का नाम भी चर्चा में है. हालांकि, मिश्रा को मास लीडर नहीं माना जाता है, लेकिन बीजेपी में वो एक ट्रबल शूटर के तौर पर पहचान रखते हैं. इसके अलावा खबर ये भी है कि जो विधायक शिवराज सिंह के नाम पर पूरी तरह सहमत नहीं हैं, ऐसे विधायकों के साथ नरोत्तम मिश्रा वक्त बिता रहे हैं.

वहीं बीजेपी सूत्रों का ये भी कहना है कि पीएम नरेंद्र मोदी ने हमेशा शिवराज सिंह के सामने नरेंद्र सिंह तोमर को प्राथमिकता पर रखा है। इसके अलावा एक तथ्य ये भी है कि अगर शिवराज सिंह को फिर से मुख्यमंत्री बनाया जाता है तो ये उनका चौथा कार्यकाल होगा. इस तरह शिवराज सिंह चौहान नरेंद्र मोदी के सीएम रिकॉर्ड से भी आगे निकल जाएंगे.

ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि बीजेपी हाई कमान कब तक एमपी में सीएम का नाम फाइनल करता है. हालांकि, फिलहाल देश कोरोना से लड़ाई लड़ रहा है, और मध्यप्रदेश में सरकार को लेकर सस्पेंस बरकरार है लेकिन इस समय में एमपी में न सरकार बनी है न कोई सिस्टम जिसपर विचार किया जा रहा है।

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