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किसान ने की काले गेहूं की खेती, एक Idea ने बदल दी जिंदगी, अब तक कमा लिए लाख रुपए

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देश में किसानों की एक अलग ही भूमिका वर्षों से रही है. एक समय में देश के भूतपूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने किसानों को सशक्त करने के लिए जय जवान जय किसान का नारा दिया था, जिसके बाद भारत देश में किसानों का हमेशा से योगदान मिलता रहा है. जानकारी के लिए बता दें कि सन 1966 के करीब अमेरिका से लाल गेहूं आता था, जिसको भारत में महंगी कीमतों में बेचा जाता है. हालांकि उस गेहूं में कई कमियां लाल बहादुर शास्त्री निकाल चुके थे, चूंकि गेंहू कम पत्थर ज्यादा होते थे. उसी को ध्यान में रखते हुए भूतपूर्व प्रधानमंत्री ने भारत के किसानों को खुद की खेती करने के लिए प्रेरित किया जो अब जोर पकड़ने लगा है. आमतौर पर किसान अपनी खेती के लिए ही जाना जाता है. हालांकि सरकार भी किसानों के लिए काफी राहत प्रदान कर रही है. जैसे MSP की कीमतें हो या डेयरी किसानों के लिए लोन सुविधा सरकार उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है. बहरहाल इन दिनों मध्य प्रदेश के एक किसान ने परंपरागत खेती की बजाए उससे हटकर खेती की है. जिससे उसे अपनी फसल की चार गुनी कीमत मिल रही है. और फिर इससे उस किसान की किस्मत में भी चार चांद लग गए हैं.

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दरअसल धार जिले में सिरसौदा के किसान विनोद चौहान ने अपनी 20 बीघा जमीन में काले गेहूं कि फसल लगाई थी. जब फसल आई तो उनके लिए खुशियों का ठिकाना नहीं रहा. 20 बीघा मे 5 क्विंटल गेहूं लगाया था जिससे 200 क्विंटल काले गेहूं की पैदावार हुई है. अब विनोद के पास दूर-दूर से इस दुर्लभ काले गेहूं को खरीदने वालों की 12 राज्यो से डिमांड आ रही है. यह गेहूं सामान्य गेहूं से कहीं ज्यादा पौष्टिक है और बीमारी से लड़ने मे मददगार होता है. इसमें आयरन भी अत्यधिक मात्रा में होता है. सिरसौदा का यह किसान इन दिनों न सिर्फ उत्साहित है बल्कि इसने काले गेहूं की पैदावार कर किसानों को कुछ नया करने की प्रेरणा भी दी है.

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इस गेहूं की कीमत की बात करें तो किसान इस गेहूं को 7 से 8 हजार रुपये क्विंटल में आसानी से बेच रहे हैं जबकि साधारण गेहूं का भाव 2 हजार रुपये क्विंटल होता है. इस तरह साधारण गेहूं की अपेक्षा काले गेहूं से चार गुना ज्यादा पैसा मिल रहा है.

कृषि उपसंचालक आर.एल. जामरे ने बताया कि पिछले साल भी कुछ किसानों ने यह गेहूं बोया था. हरियाणा से बीज लेकर आए थे. इस साल हमारे किसानों ने काफी जगहों पर काला गेहूं बोया है. चूंकि यह बात अभी हमारी विभागीय प्रक्रिया में तो नहीं आई है लेकिन किसानों ने जो बोया उसका रिजल्ट अच्छा बता रहे हैं. किसानों से चर्चा की तो उनका यह कहना था कि ये जो गेहूं है वह डायबिटीज वाले लोगों के लिए फायदेमंद है. गेहूं जल्दी पच जाता है. इसका स्वाद भी शरबती गेहूं जैसा बताया गया है.

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काले गेहूं की फसल की खेती करने वाले विनोद चौहान ने बताया कि इस खेती में 20 बीघा में 25 हजार रुपये की रिस्क थी. अगर में साधारण गेहूं बोता तो उसमें 25 हजार रुपये कम खर्च लगता और इसमें 25 हजार रुपये ज्यादा लगा. इसमें औषधीय गुणों की मात्रा बहुत ज्यादा है. यह कैंसर, ब्लड प्रेशर, मोटापा, शुगर वाले पेशेंट के लिए बहुत अच्छा गेहूं है. विनोद ने बताया कि अब सोशल मीडिया के माध्यम से बहुत सारे फोन आ रहे हैं. इसका अच्छे से प्रचार प्रसार हुआ है और कम से कम 12 राज्यों से फोन आ रहे हैं जहां के किसान भी इसे बोने के इच्छुक हैं.

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