वैज्ञानिकों की इस भविष्यवाणी से खौफ में आए दुनियाभर के कोरोना मरीज, ये है बड़ी वजह

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एक तरफ कोरोना का कहर तो दूसरी तरफ कोरोना से दुरूस्त होने के बाद भी दूसरी गंभीर बीमारियों की गिरफ्त में आने की लहर। अब ऐसे में यह उन लोगों के लिए गंभीर समस्या का रूख धारण करती जा रही है, जो उत्तरोत्तर कोरोना को मात देकर दुरूस्त हो रहे हैं। वैज्ञानिकों ने अपने शोध में इस बात का खुलासा करते हुए साफ कर दिया है कि जो लोग कोरोना से दुरूस्त हो रहे हैं, उनमें से 90 फीसद मरीज तो ऐसे हैं, जिन्हें फेफड़े की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। यह आंकड़े चीन के वुहान शहर में दुरूस्त हो रहे मरीजों के आधार पर तैयार किए गए हैं। इतना ही नहीं, हालिया शोध में तो यह भी कहा कि जो लोग कोरोना से ठीक हो रहे हैं, वे फिर बाद में भी कोरोना से संक्रमित हो जा रहे हैं, लिहाजा ऐसे सभी लोगों को एहतियातन बरतते हुए क्वाराइंटिन किया जा रहा है, ताकि आगमी दिनों में संक्रमण के खतरे को कम किया जा सके।

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वैज्ञानिकों ने शोध में आंकड़ों का हवाला देते हुए इस बात की तस्दीक की है, जो लोग कोरोना से दुरूस्त हो रहे हैं, उनमें से 5 फीसद मरीज, तो ऐसे हैं,  जो दोबारा कोरोना से संक्रमित हो जा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, वुहान में ऐसे  मामले सामने आ रहे हैं, जो मरीज कोरोना को मात देने के बाद भी दोबारा संक्रमित हो जा रहे हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह आगामी दिनों में खतरनाक स्थिति हो सकती है, लिहाजा ऐसी घातक स्थिति का हम दट कर सामना कर सके इसके लिए हमें तैयार रहना होगा। याद दिला दे कि इससे पहले भी वैज्ञानिकों ने अपने शोध में खुलासा करते हुए कहा था कि जो लोग कोरोना से दुरूस्त हो रहे हैं, उन्हें आगामी दिनों में गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है। मौजूदा समय में समस्त विश्व में कोरोना वायरस का कहर बरप रहा है। लागातार संक्रमितों की संख्या बढ़ती जा रही है।

भारत में कोरोना की स्थिति 
यहां पर हम बताते चले कि भारत के यदि कुछ राज्यों को फेहरिस्त से बाहर कर दे, तो यहां पर कोरोना वायरस का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भारत में कोरोना संक्रमण के मामले 19 लाख के पार पहुंच चुके हैं, तो वहीं सक्रिय मामलों की संख्या 5 लाख के पार है। फिलहाल में भारत में लगातार कोरोना संक्रमण के ममले पकड़ने के लिए लगातार टेस्टिंग का सिलसिला जारी है, चूंकि यही एकमात्र तरीका है, जिसके मार्फत कोरोना मरीजों को चिन्हित कर उनका उपचार शुरू कराया जा सकता है।

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