गजब है! लोकसभा अध्यक्ष की ये बात सुनकर ही सदन में थम जाता है हंगामा

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में नए लोकसभा स्पीकर बनाए गए हैं। जिसका कारण है सुमित्रा महाजन का चुनाव ना लड़ना। इसी वजह से राजस्थान के कोटा से चुनाव लड़ने वाले ओम बिड़ला को लोकसभा स्पीकर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। और जबसे नए लोकसभा स्पीकर सदन में विराजमान हुए हैं, तभी से सदन का माहौल काफी बदला-बदला नजर आ रहा है। वो इसलिए भी क्योंकि ओम बिड़ला सदन में सबसे ज्यादा जोर हिंदी भाषा पर देते हैं। और वो सभी सदस्यों से हिंदी में ही बात करना पसंद करते हैं। ओम बिड़ला जबसे लोकसभा स्पीकर की कुर्सी पर बैठे हैं, तबसे सदन के नियमों का पालन भी पूरे अनुशासन के साथ किया जा रहा है। लोकसभा स्पीकर ने संसद में विधेयक पर वोटिंग के समय होने वाली परंपरा में भी बदलाव कर दिया है। अब लोकसभा में स्पीकर ‘आइस’ और ‘नोस’ के जगह ‘हां’ और ‘ना’ शब्दों का प्रयोग करते हैं। साथ ही साथ सदन में वह सांसदों के लिए माननीय सदस्य शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन अगर सदन में हुए अब तक हंगामों पर नजर डाली जाए तो अक्सर लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला आसन पैरों पर है कहते नजर आते हैँ। आखिर वो ऐसा क्यों कहते हैं तो चलिए जानते हैं आखिर लोकसभा स्पीकर के आसन पैरों पर है वाक्य का क्या मतलब होता है। ये भी पढ़ेंः- लोकसभा अध्यक्ष बनते ही ओम बिड़ला का खुला ऐलान संसद में अब ये काम किया तो अंजाम बुरा होगा

‘आसन पैरों पर है’
सदन में जब भी किसी कार्यवाही के वक्त हंगामा खड़ा हो जाता है। तब लोकसभा स्पीकर ‘आसन पैरों पर है’ कहते हैं। और इस वाक्य का उपयोग वो एक बार नहीं बल्कि कई बार कर चुके हैं। उनके इस वाक्य का असल मतलब होता है कि, सभापति अपने आसन से इस समय खड़ा है, इसलिए बाकी सदस्य अपनी सीट पर बैठ जाए। असल में सदन में ये परंपरा रही है कि, जब किसी विषय पर चर्चा चल रही हो और सांसद अपनी बात कह रहे हों, तभी अगर सभापति अपने आसन से खड़े हो जाएं तो सदस्य को अपनी बात रोककर बैठना पड़ता है। सदन में पद के प्रोटोकॉल के मुताबिक सभापति से बड़ा कोई दूसरा सदस्य नहीं होता है। सभापति को ही सदन का संरक्षक माना जाता है। सदन के सभापति को देश के प्रधानमंत्री तक सभापति महोदय या माननीय सभापति कहकर पुकारते हैं। यही कारण है कि, सभापति के अपने आसन से खड़े होने के बाद सभी सदस्यों को उनके सम्मान में अपनी बातों को बीच में रोककर आसन पर बैठना पड़ता है।

एक बार में सिर्फ एक व्यक्ति ही रख सकता है अपनी बात
दरअसल सदन में किसी भी विषय पर चर्चा के दौरान सिर्फ एक व्यक्ति ही अपनी बात रख सकता है, क्योंकि सदन में कही गई सारी बातें लिखित में दर्ज की जाती हैं, अब अगर दो व्यक्ति एक साथ बोलने लगते हैं तब उन बातों को दर्ज करने में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। यही कारण है कि, स्पीकर एक बार में एक व्यक्ति को बोलने के ही निर्देश देता है।

ब्रिटिश से जुड़ा है भारत का संविधान
जानकारी के लिए आपको बता दें कि, भारत के संविधान का बड़ा हिस्सा ब्रिटेन के संविधान से लिया गया है। सदन के कायदे-कानून ब्रिटिश की संसद की तरह ही बनाए गए हैँ। जिस तरह ब्रिटेन की संसद में एक व्यक्ति तभी तक बोल सकता है जब सदन के स्पीकर उन्हें आदेश देंगे। पर अगर एक सांसद के बीच में ही दूसरा व्यक्ति बोलता है तब स्पीकर फौरन दूसरे सांसद को अपनी सीट पर बैठने के आदेश देते हैं। अगर कोई व्यक्ति अपनी बात सदन में रखना चाहता है, तो वो अपनी सीट से हाथ उठाकर स्पीकर का ध्यान खींच सकता है, लेकिन बिना अनुमति कोई सांसद अपनी सीट से नहीं उठ सकता।

लोकसभा स्पीकर ने अपनाया है कड़ा रवैयावैसे तो ओम बिड़ला ने लोकसभा स्पीकर बनने के बाद से सदन में काफी बदलाव किए हैँ। सदन में सभापति ने सबको ये आदेश दिए हैं कि, चर्चा के दौरान सदस्य आपस में बातचीत नहीं करेंगे। पर जरूरी बात होने पर सदन से बाहर जाकर बात हो सकती है लेकिन सदन में नहीं। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में कैबिनेट में कई नए सदस्यों ने भी शिरकत की है। इस बात का सदन में खास ध्यान रखा जा रहा है। और उन्हें अपनी बात रखने के मौके भी दिए जा रहे हैं। ये भी पढ़ेंः- मोदी सरकार का बंपर ऐलान आपको मिलेगी 5 लाख रुपये की छूट, बस ये काम कर लीजिए

आपको बता दें, जिस तरह लोकसभा स्पीकर सदन में सांसदों की क्लास लगा रहे हैं। उन्हें सदन के नियमों के मुताबिक चलने के आदेश दे रहे हैं। उसी तरह पीएम मोदी ने भी अपने सभी मंत्रियों की क्लास लगाई थी। जिसका वीडियो हम आपको नीचे दिए लिंक में दिखा रहे हैँ।

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