बेहद गरीब किसान का बेटा बना IPS अफसर, अमेरिका से मिली ट्रेनिंग

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इंसान चाहे तो क्या नहीं कर सकता। वो चाहे तो मेहनत के बल पर पहाड़ को चीर कर रख सकता है। अपनी मेहनत के बल पर अपनी जिंदगी संवार सकता है। कुछ यही हुआ है मुंबई पुलिस के अतिरिक्त आयुक्त प्रताप आर दिघावकर के साथ। किसान परिवार से आने वाले दिघावकर ने गरीबी भी देखी, लेकिन उनकी चाह ने उनके लिए राह बनाई और आज वो इस औहदे तक पहुंच गए। उनके जीवन और संघर्षों के बारे में एक फोटोब्लॉग, ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे ने कहानी साझा की जिसके बाद लोगों को उनके मजबूत इरादों के बारे में पता चला।

दिघावकर ने आर्थिक तंगी की वजह से बीच में अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी। और मजबूरन खेतों में हल चलाने जाना पड़ता था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और जिन्दगी में कामयाब होकर दिखाया। यहां तक कि उन्हें अमेरिका से ट्रेनिंग भी मिली है। दिघावकर हमेशा से सरकार का हिस्सा बनना चाहता था। यह उनके बचपन का सपना था जो कड़ी मेहनत और संघर्ष के बाद सच साबित हुआ।

नासिक के पास एक छोटे से गांव लितानिया में दिघावकर का जन्म हुआ। दिघावकर बताते है कि हमारे गांव में हमारे पास केवल एक प्राथमिक स्कूल था और पुरुषों के लिए एकमात्र उपलब्ध पेशा खेती कर रहा था, लेकिन जब से मैं छोटा था तब से ही सरकार का हिस्सा बनना चाहता था। वह बताते है कि उनके यहां तक पहुंचने के पीछे की घटना भी मजेदार रही। जब दिघावकर छोटे थे तो उन्होंने एक हवाई जहाज देखकर अपनी मां से पूछा था कि इनका मालिक कौन है तो उन्होंने जवाब दिया ‘सरकार’। तब से ही वह इसका हिस्सा बनना चाहते थे। वह बताते है कि रात और दिन की पढ़ाई की। और पहली बार एसएससी बोर्ड की परीक्षा में खड़े हुए। उसके बाद उन्हें कॉलेज की पढ़ाई के लिए 23 किलोमीटर दूर जाना पड़ता था। इसके बावजूद उन्होंने कॉलेज का एक दिन भी मिस नहीं किया। परीक्षा में उनके 86% अंक आए लेकिन एक नंबर की वजह से उनका कॉलेज में एडमिशन नहीं हो पाया। तब मेरे पिता ने मुझसे कहा कि यह मेरे लिए पढ़ाई छोड़ने और किसान बनने का समय था।

16 वर्ष की उम्र में, मैं पूर्णतया किसान बन गया था, लेकिन मेरे पिता के साथ विवाद के कारण मैंने आगे पढ़ाई करने के सपने फिर से जीने का फैसला लिया। मैंने अपनी मां से 350 रुपए उधार लिया और दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम में नामांकित कर लिया। मैं अभी भी खेती में कड़ी मेहनत कर रहा था और अपनी डिग्री प्राप्त करने के लिए रात में पढ़ाई कर रहा था। 18 साल की उम्र में मैंने 1,250 रुपये की कुल राशि के साथ अपनी स्नातक स्तर की पढ़ाई पूरी कर ली। मैंने पुलिस सेवा परीक्षा और संयुक्त रक्षा परीक्षा पास की। 1987 में मात्र 22 साल की उम्र में असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर की पोस्ट के लिए चुन लिया गया। इसके बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी और नौकरी में रहते हुए भी लगातार पढ़ाई की। और साल 2000 में उन्हें आईपीएस के लिए चुन लिया गया। उन्हें वानश्री और इंदिरा प्रियदर्शिनी अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है।

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