Friday, December 3, 2021

चकमा दे कर घातक हमले में माहिर है INS वेला, भारतीय नौसेना को मिली ‘स्टिंग रे’ जैसी ताकत

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दिल्ली। भारतीय नौसेना को गुरूवार को आईएनएस वेला हमलावर पनडुब्बी मिल गई है। प्रोजेक्ट 75 के तहत भारत में बनी यह पनडुब्बी कलवारी क्लास के पहले बैच की 6 पनडुब्बियों में से एक है। आईएनएस वेला डीजल-इलेक्ट्रिक अटैक सबमरीन है, जिसे रक्षा एक्सपर्ट साइलेंट किलर का नाम दे रहे हैं। यह चकमा देकर हमला करने में माहिर है। समुद्र में जब यह गोता लगाती है तो दुश्मन को इसके आने की आहट भी नहीं लगती है। आईएनएस वेला सबमरीन को फ्रांसीसी डिजाइन वाली स्कॉर्पिन क्लास की पनडुब्बी के आधार पर बनाया गया है। आईएनएस वेला सबमरीन को मझगांव डॉक लिमिटेड ने बनाया है। इसे बनाने की शुरुआत 6 मई 2019 को हुई थी। वेला का पूरी तरह से ट्रायल लेने के बाद मझगांव डॉक लिमिटेड ने इसे 9 नवंबर 2021 को हैंडओवर कर दिया है। चीफ ऑफ नेवल स्टाफ एडमिरल करमबीर सिंह की मौजूदगी में इसे भारतीय नौसेना को सौंपा गया।

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 Indian vela 1

शांत और ताकतवर इंजन

आईएनएस वेला 221 फीट लंबी सबमरीन है। इसका बीम 20 फीट का है। ऊंचाई 40 फीट और ड्रॉट 19 फीट का है। इसमें चार विशेष डीजल इंजन लगा है। 360 x बैटरी सेल्स हैं। डीआरडीओ द्वारा बनाया गया पीएमएफसी फ्यूल सेल भी है। वेला को ताकत देने के लिए बेहतरीन इंजन लगाया गया है। बिना आवाज के यह तेज गति से दुश्मन की तरफ हमला कर सके।

वेला की रफ्तार

समुद्री लहरों पर यह 20 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चलती है। जब आईएनएस वेला सबमरीन समुद्र के अंदर गोते लगाती है तब इसकी गति 37 किलोमीटर प्रतिघंटा होती है। यह समुद्र के ऊपर 15 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से एक बार में 12 हजार किलोमीटर की यात्रा कर सकती है। पानी के अंदर यह 7.4 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से 1020 किलोमीटर की यात्रा करने में सक्षम है। आईएनएस वेला पानी के अंदर 50 दिनों तक रह सकती है। आईएनएस वेला सबमरीन अधिकतम 1150 फीट की गहराई तक गोता लगाने में सक्षम है। वेला में आठ नौसेना अधिकारी और 35 सैनिक तैनात हो सकते हैं। वेला में दुश्मन पर हमला करने के लिए मिसाइलें और टॉरपीडो लगे हैं।

आईएनएस वेला में 6 x533 मिलिमीटर के टॉरपीडो ट्यूब्स हैं, जिसमें 18 एसयूटी टॉरपीडो तैनात किये जा सकते हैं। ये जर्मन तकनीक के टॉरपीडो हैं। यह एक ड्यूल परपज हथियार है जिसे जहाज, पनडुब्बी और तटों से भी दागा जा सकता है। पनडुब्बी में 30 समुद्री माइन्स भी तैनात किए जा सकते हैं। ये दुश्मन के जहाज या पनडुब्बी से टकराते ही फट पड़ते हैं। आईएनएस वेला में एंटी-शिप मिसाइलें तैनात की जा सकती हैं। ये मिसाइलें पनडुब्बी के अंदर से निकल कर सीधे दुश्मन के जहाज या युद्धपोत पर हमला करती हैं। इनकी गति 1148 किलोमीटर प्रतिघंटा होती हैं। यह मिसाइल लॉन्च हो गई तो दुश्मन को बचने के लिए ज्यादा समय नहीं मिलता है। नई आईएनएस वेला से पहले भारत के पास इसी नाम की पनडुब्बी साल 1973 में थी। उसने साल 2010 तक भारतीय नौसेना के लिए काम किया। वह सोवियत काल के फॉक्सट्रोट क्लास पनडुब्बी का हिस्सा थी। नई पनडुब्बी को भारतीय नौसेना के पश्चिमी कमांड, मुंबई में ही तैनात किया जाएगा।

ऐसे बनी आईएनएस वेला

आईएनएस वेला मेक इन इंडिया प्रोग्राम के तहत बनाई गई है। वेला एक प्रकार की भारतीय मछली है, जो स्टिंग-रे फैमिली में आती है। यह मछली समुद्र की खतरनाक शिकारियों में से एक है। इसका डंक किसी भी जीव को खत्म करने के लिए काफी है। स्टिंग-रे मछली पूरी दुनिया में अपनी चतुरता, घातक हमला, बचाव के तरीकों और आक्रामकता के लिए जानी जाती है।

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