झारखंड के बोकारे से मौखिक रूप से नवविवाहिता को ‘तलाक-तलाक-तलाक’ कह कर घर से बाहर निकालने का केस सामने आया है. ये केस बुधवार को बोकारो के माराफारी थाना पंहुचा. जहां पर 20 साल की पीड़िता को मौखिक रूप से तलाक दे दिया गया और ससुराल से निकाल कर बोकारो सिवनडीह मायके लाकर हाईवे के किनारे अकेले छोड़ दिया गया. हाईवे से मुश्किलों का सामना करते हुए विवाहिता अपने मायके पहुंची.

मायकेवालों को बताई घटना

इस घटना का जिक्र पीडिता ने अपने मायके को बताई, फिर उसके पिता उसे थाने लेकर पहुंचे और प्राथमिकी दर्ज कराई. पीड़िता ने पति नसीम अंसारी, सास रौशन आरा, ससुर हैदर अंसारी को आरोपी बताया है. स्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण बिल 2019 के तहत प्राथमिकी आरोपियों के खिलाफ दर्ज की गयी है.

जो प्राथमिकी पीड़िता ने दर्ज करवाई उसके अनुसार 2 नवंबर 2019 को उसकी शादी हुई थी. दहेज नगदी समेत उसे 17 लाख रुपये दिये गये थे. ससुराल में कुछ दिन सब अच्छा रहा फिर ससुरालियों ने आल्टो कार लड़की वालों से मांग ली, लड़की के पिता ने दमाद को कार के लिए डेढ़ लाख रुपए दे दिये, बेटी कुछ दिन ठीक रही . इसके बाद फिर उससे मारपीट व प्रताड़ना देना शुरु कर दिया गया और फिर से दहेज की मांग की गयी. पीड़िता से कहा गया कि रुपए नहीं मिले तो तलाक दे देगा.’

इसके आगे पीड़िता के पिता ने कहा कि ‘ पीड़िता के प्रति आरोपी ससुर का नजरिया सही नहीं था. अक्सर वो उनकी बेटी के साथ गलत व्यवहार करता था. 12 जून को पीड़िता के पेट मे दर्द था. जिसके बाद आरोपी ससुर ने एक पुड़िया दी, उसे खाकर पीड़िता सो गई और उसका पति भी दूसरे कमरे में सो गया. तभी पीड़िता के ससुर ने उसके साथ गलत काम करने की कोशिश की. तो वहीं इस बारे में जब महिला ने ससुर की इस हरकत के बारे में पति को बताया तो उसने बेवजह पिता पर आरोप लगाने की बात कही और उसके साथ मारपीट भी की. सके बाद मौखिक रूप से तीन बार ‘तलाक तलाक तलाक’ बोलकर मायके पंहुचा दिया.’

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